लोको ट्रेन हादसा- विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना में THDC की जांच कमेटी गठित..
उत्तराखंड: उत्तराखंड अलकनंदा पर निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में 30 दिसंबर को हुए लोको ट्रेन हादसे के बाद अब परियोजना के सुरक्षा इंतजामों की पूर्ण समीक्षा शुरू कर दी गई है। हादसे में 70 श्रमिक और कर्मी घायल हुए थे, जिनमें से अधिकांश को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। वर्तमान में केवल पांच कर्मियों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में दुर्घटना के बाद टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने एक जांच कमेटी गठित की है। परियोजना के महाप्रबंधक अजय वर्मा ने कहा कि सुरक्षा मानकों, वैधानिक प्रावधानों और मानव परिचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 3 किलोमीटर लंबी बची हुई सुरंग के निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
हादसे के बाद जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने भी स्थल का निरीक्षण किया था और टीबीएम साइड पर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की थी। परियोजना प्रमुख अजय वर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन और टीएचडीसी की संयुक्त जांच कमेटी सभी पहलुओं का विश्लेषण कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अस्पताल में भर्ती कर्मियों को समुचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और टीएचडीसी की ओर से उनका पूर्ण इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। हादसे के बाद सुरंग में कार्य कुछ दिनों के लिए रोका गया था। बृहस्पतिवार से चमोली जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने घटना की जांच शुरू कर दी है। पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट ने टीबीएम साइड का निरीक्षण किया, जबकि शुक्रवार को एसडीएम चमोली राजकुमार पांडेय सुरंग का जायजा लेंगे।
मजिस्ट्रेटी जांच के दौरान सुरंग में टीबीएम और मैनुअल कार्य स्थगित रहेंगे। जानकारी के अनुसार हादसे वाली लोको ट्रेन का ऑपरेटर एचसीसी (हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी) का कर्मी था, जिसे परियोजना में एक माह पहले ही तैनात किया गया था। परियोजना प्रमुख ने बताया कि चालक की सेवा समाप्त कर दी गई है और जिलाधिकारी के निर्देश पर मजिस्ट्रेटी जांच पूरी होने तक उसे स्टेशन से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। टीएचडीसी ने दुर्घटना के बाद सुरक्षा और निगरानी उपायों को और पुख्ता करने का आश्वासन दिया है, ताकि परियोजना में श्रमिकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित रहे।


