महिला आयोग की नई व्यवस्था, अब मौके पर ही होगा मामलों का समाधान..
उत्तराखंड: देशभर में महिलाओं को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने की दिशा में एक अहम पहल के तहत राष्ट्रीय महिला आयोग ने नई व्यवस्था लागू की है। अब पीड़ित महिलाओं को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए लंबे समय तक इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि उन्हें मौके पर ही सुनवाई और न्याय मिलने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। आयोग की इस पहल को “महिला आयोग आपके द्वार” अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को सीधे लोगों तक पहुंचाना है। इस अभियान के तहत देश के विभिन्न हिस्सों में जनसुनवाई आयोजित की जा रही है, जहां संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में महिलाओं की समस्याओं को मौके पर ही सुना और निपटाया जा रहा है। हाल ही में आयोजित विशेष अभियान के दौरान 9 से 14 मार्च के बीच देश के 500 जिलों में जनसुनवाई की गई, जिसमें लगभग 15 हजार महिलाओं की शिकायतों का त्वरित समाधान किया गया। यह आंकड़ा इस पहल की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों के प्रभावी निस्तारण के लिए आयोग नियमित रूप से राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) के साथ बैठक करता है। इन बैठकों में न केवल लंबित मामलों की समीक्षा की जाती है, बल्कि पीड़ित महिलाओं के साथ संवेदनशील व्यवहार को लेकर पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित भी किया जाता है। इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के लिए विशेष व्यवस्था तैयार करना भी है। अब ऐसे कामगार वर्ग की महिलाओं के लिए प्रदेश स्तर पर शिकायत और जांच समितियों का गठन किया गया है, जिससे उनकी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर ही समाधान संभव हो सके। पहले कई मामलों में जानकारी और पहुंच के अभाव में शिकायतें आयोग तक नहीं पहुंच पाती थीं, लेकिन अब नई व्यवस्था के जरिए इन्हें प्रारंभिक स्तर पर ही दर्ज कर आगे बढ़ाया जाएगा।
इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों में भी स्थानीय समितियों का गठन किया गया है, जो पीड़ित महिलाओं की शिकायतों को दर्ज कर उन्हें आयोग तक पहुंचाने का काम करेंगी। इसके बाद आयोग की टीम स्वयं संबंधित क्षेत्र में पहुंचकर मामले की सुनवाई करेगी। इस प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन के अधिकारी जैसे आयुक्त, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी शामिल होंगे, ताकि मामले का त्वरित और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया जा सके। आयोग ने हाल के दिनों में कई मामलों में सीधे मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप भी किया है। उदाहरण के तौर पर हिमाचल प्रदेश में एक मामले में आयोग की टीम ने स्थल पर जाकर जांच की और समाधान की दिशा में कदम उठाए। इस तरह की कार्रवाई से न केवल पीड़िताओं का भरोसा बढ़ा है, बल्कि न्याय प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और पारदर्शी हुई है। कुल मिलाकर “महिला आयोग आपके द्वार” जैसी पहल महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को आसान, तेज और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है। इससे उन महिलाओं को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जो अब तक संसाधनों या जानकारी के अभाव में अपनी आवाज नहीं उठा पाती थीं।

