हीटवेव से सुरक्षा के इंतजाम, स्कूलों में नियमित बजेगी वाटर बेल..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी और संभावित हीटवेव को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। बच्चों और आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने कई अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसी क्रम में सभी विद्यालयों में नियमित अंतराल पर ‘वाटर बेल’ बजाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि छात्र-छात्राएं समय-समय पर पानी पीते रहें और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं से बचाव हो सके। उच्च स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया गया कि गर्मियों के दौरान स्कूलों में बच्चों की सेहत के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। इसके लिए विद्यालयों के समय में जरूरत के अनुसार बदलाव करने, कक्षाओं में पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करने और प्राथमिक उपचार की व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों में ओआरएस, जरूरी दवाओं और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री का स्टॉक रखने को भी कहा गया है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को हीटवेव के खतरे और उससे बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि वे खुद को सुरक्षित रख सकें। प्रशासन का मानना है कि जागरूकता और समय पर सावधानी से गर्मी से होने वाली बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
जिलों को अलर्ट: तैयार करें हीटवेव एक्शन प्लान..
राज्य के सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द हीटवेव एक्शन प्लान तैयार करें। इसमें संवेदनशील और अधिक प्रभावित क्षेत्रों (हॉटस्पॉट) की पहचान कर वहां विशेष निगरानी और राहत उपाय सुनिश्चित किए जाएं। खासतौर पर खुले में काम करने वाले श्रमिकों के लिए कार्य समय में बदलाव करने और उन्हें जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। प्रशासन का फोकस साफ है गर्मी के इस दौर में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी मजबूत हो, ताकि आमजन और खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ये भी निर्देश दिए..
पानी की किल्लत वाले इलाके में निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोकें।
प्रदेशभर में बसों, स्टेशन व बाजार में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करें।
अस्पतालों में हीट वेव से प्रभावितों के उपचार के लिए पर्याप्त बेड हों।
जरूरी दवाइयों, ओआरएस व आइस पैक की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
बिजली की मांग बढ़ सकती है, ऐसे में वैकल्पिक योजना तैयार की जाए।


