उत्तराखंड में शुरू होगा सबसे बड़ा आपदा प्रशिक्षण अभियान, 3 लाख लोग होंगे प्रशिक्षित..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में बढ़ते आपदा खतरे और आगामी मानसून सीजन को देखते हुए राज्य सरकार ने इस बार आपदा प्रबंधन तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने वर्ष 2026 में अब तक का सबसे बड़ा सामुदायिक प्रशिक्षण अभियान शुरू करने की तैयारी की है। सरकार ने लक्ष्य तय किया है कि इस वर्ष तीन लाख लोगों और स्कूली बच्चों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि आपदा के शुरुआती समय में स्थानीय स्तर पर त्वरित राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। उत्तराखंड भौगोलिक दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील राज्यों में शामिल है। यहां हर वर्ष मानसून के दौरान भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़, हिमस्खलन, जंगल की आग और भूकंप जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में कई बार सड़क और संचार व्यवस्था बाधित हो जाने के कारण राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। ऐसे हालात में स्थानीय लोग ही सबसे पहले राहत और बचाव की जिम्मेदारी संभालते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार अब सामुदायिक आधारित आपदा प्रबंधन मॉडल पर जोर दे रही है।
आपदा प्रबंधन विभाग का मानना है कि यदि गांव स्तर तक लोगों को प्राथमिक बचाव, प्राथमिक उपचार, सुरक्षित निकासी और प्रशासन को त्वरित सूचना देने जैसी बुनियादी जानकारी होगी तो आपदा के दौरान होने वाली जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से स्कूलों, कॉलेजों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ा जा रहा है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण अभियानों में लगातार विस्तार हुआ है। वर्ष 2020 में जहां 75 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए थे और करीब 1191 लोगों ने प्रशिक्षण लिया था, वहीं 2021 में यह संख्या बढ़कर 150 कार्यक्रम और 4760 प्रशिक्षुओं तक पहुंच गई। इसके बाद 2022 में 198 कार्यक्रमों के जरिए 14 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया।
वर्ष 2023 में विभाग ने बड़े स्तर पर अभियान चलाते हुए 463 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें करीब 66 हजार से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। वहीं 2024 में 481 कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 62 हजार लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। वर्ष 2025 में विभाग ने रिकॉर्ड स्तर पर 972 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें सबसे अधिक करीब 1 लाख 19 हजार लोगों ने भाग लिया। पिछले छह वर्षों में राज्यभर में कुल 2339 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं और करीब 2 लाख 69 हजार लोग आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। अब सरकार ने एक ही वर्ष में तीन लाख लोगों को प्रशिक्षित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस बार प्रशिक्षण कार्यक्रमों में केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं बल्कि व्यावहारिक अभ्यास पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। लोगों को भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ के दौरान सुरक्षित रहने के तरीके सिखाए जाएंगे। साथ ही प्राथमिक उपचार, राहत उपकरणों के उपयोग, सुरक्षित निकासी और आपसी समन्वय की जानकारी भी दी जाएगी।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि स्कूलों में बच्चों के लिए विशेष मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, ताकि आपदा के समय वे घबराने के बजाय सही तरीके से प्रतिक्रिया दे सकें। बच्चों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा इस महीने 28 और 29 तारीख को भारत सरकार की एजेंसियों के सहयोग से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। मानसून के दौरान बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं में तेजी आई है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ग्लेशियरों के पिघलने और अचानक जलस्तर बढ़ने की घटनाएं भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। ऐसे हालात में केवल राहत कार्यों पर निर्भर रहने के बजाय पूर्व तैयारी और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण को सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।
सरकार की कोशिश है कि हर जिले, ब्लॉक और गांव स्तर तक प्रशिक्षित लोगों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाए। यदि यह योजना सफल होती है तो उत्तराखंड देश के उन राज्यों में शामिल हो सकता है जहां सामुदायिक आधारित आपदा प्रबंधन मॉडल सबसे अधिक प्रभावी होगा। विभाग का मानना है कि प्रशिक्षित नागरिक न केवल खुद को सुरक्षित रख पाएंगे बल्कि आपदा के दौरान आसपास के लोगों की मदद भी कर सकेंगे। इससे प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने में बड़ी मदद मिलेगी और रिस्पांस टाइम को काफी कम किया जा सकेगा।
