उत्तराखंड में साल में दो बार होगी UTET, हजारों शिक्षकों को मिलेगी राहत..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूटीईटी) को लेकर बड़ा बदलाव किए जाने की तैयारी चल रही है। राज्य सरकार केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) की तर्ज पर अब वर्ष में दो बार यूटीईटी आयोजित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस कदम का उद्देश्य उन हजारों शिक्षकों को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है, जिन्हें सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। राज्य के शिक्षा विभाग के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में यूटीईटी का आयोजन वर्ष में केवल एक बार हो पाता है, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षकों को परीक्षा देने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते।
इसी कारण लंबे समय से परीक्षा की आवृत्ति बढ़ाने की मांग उठ रही थी। देश की सर्वोच्च अदालत के निर्देशों के अनुसार कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ाने वाले सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा पास नहीं करने पर शिक्षकों के सामने सेवा संबंधी जटिलताएं खड़ी हो सकती हैं। साथ ही पदोन्नति की प्रक्रिया पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। शिक्षकों को वर्ष 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने का अवसर दिया गया है, लेकिन परीक्षा का सीमित आयोजन उनकी चिंता बढ़ा रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा वर्ष में दो बार यूटीईटी कराने की योजना को राहत भरे कदम के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य में एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा वर्ष 2010 से पहले नियुक्त उन शिक्षकों से जुड़ा हुआ है, जिनके पास बीएड की योग्यता है। इन शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान आवेदन प्रक्रिया में उनके लिए अलग से कोई उपयुक्त विकल्प उपलब्ध नहीं है, जिससे उन्हें परीक्षा में शामिल होने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षक संगठनों का दावा है कि इस स्थिति के कारण हजारों शिक्षकों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कई शिक्षक विशेष यूटीईटी परीक्षा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं ताकि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर पात्रता हासिल कर सकें। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के मौजूदा नियमों में सेवारत शिक्षकों के लिए अलग से विभागीय टीईटी आयोजित करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। ऐसे में विशेष परीक्षा आयोजित करना आसान नहीं माना जा रहा। इसके बावजूद शिक्षा विभाग विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आवेदन प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन कर सेवारत शिक्षकों के लिए अलग श्रेणी या विकल्प जोड़ा जा सकता है, जिससे उन्हें परीक्षा में शामिल होने में सुविधा मिल सके।
उत्तराखंड में पिछली शिक्षक पात्रता परीक्षा सितंबर 2025 में आयोजित की गई थी। इसके बाद से अब तक नई परीक्षा का आयोजन नहीं हो सका है। ऐसे में एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद उम्मीदवार अगली परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर केंद्र सरकार नियमित रूप से वर्ष में दो बार सीटीईटी का आयोजन करती है, जिससे अभ्यर्थियों को पात्रता हासिल करने के अधिक अवसर मिलते हैं। इसी मॉडल को देखते हुए उत्तराखंड में भी परीक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की जा रही है। शिक्षा विभाग और परीक्षा आयोजन से जुड़े अधिकारियों के स्तर पर विभिन्न विकल्पों पर मंथन जारी है। परीक्षा में शामिल होने वाले संभावित शिक्षकों की संख्या और उनकी पात्रता का आकलन भी किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही संबंधित विभागों की बैठक आयोजित कर यूटीईटी को वर्ष में दो बार कराने, आवेदन प्रक्रिया में बदलाव और शिक्षकों को राहत देने संबंधी प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो राज्य के हजारों शिक्षकों और भावी अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिलेगी तथा निर्धारित समय सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करने का बेहतर अवसर प्राप्त होगा।

