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हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार की तैयारी, 72 उपनलकर्मियों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा..

Admin by Admin
2026-06-17
in उत्तराखंड
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हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार की तैयारी, 72 उपनलकर्मियों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा..
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हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार की तैयारी, 72 उपनलकर्मियों का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा..

 

उत्तराखंड: राज्य कर विभाग में कार्यरत उपनलकर्मियों के नियमितीकरण, समान वेतन और सेवा संबंधी अन्य लाभों को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार ने इस मामले में हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती देने का फैसला किया है और अब सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका (एसएलपी) दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है। शासन ने राज्य कर विभाग को आवश्यक प्रस्ताव जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। सूत्रों के अनुसार हाल ही में शासन स्तर पर इस विषय को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें न्याय, वित्त, राज्य कर, कार्मिक और सैनिक कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य हाईकोर्ट द्वारा विभिन्न याचिकाओं में दिए गए आदेशों की समीक्षा करना और उपनल कर्मियों द्वारा प्रस्तुत प्रत्यावेदनों पर विचार करना था।

राज्य कर विभाग में उपनल के माध्यम से कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटरों से जुड़ी कई याचिकाएं न्यायालय में विचाराधीन रही हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार विभिन्न रिट याचिकाओं के अंतर्गत 116 कर्मचारी शामिल हैं। इनमें से अधिकांश कर्मचारियों ने शासन स्तर पर अपने प्रत्यावेदन प्रस्तुत कर नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा में कृत्रिम व्यवधान समाप्त करने, बकाया भुगतान और अन्य सेवा लाभों की मांग की थी। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से विभाग में कार्य करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं और आर्थिक लाभ नहीं मिल पाए हैं। वहीं कई कर्मचारियों ने सेवा से बाहर किए गए समय का वेतन भी देने की मांग उठाई है।

शासन स्तर पर हुई समीक्षा के दौरान कर्मचारियों को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित कर उनकी सेवा स्थिति का अध्ययन किया गया। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन कर्मचारियों को लेकर सामने आई जिनकी सेवाओं में अलग-अलग समय पर व्यवधान दर्ज है। बताया गया कि बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं जिनकी नियुक्ति अवधि के दौरान बीच-बीच में सेवा में ब्रेक रहा है। यही बिंदु सरकार और कर्मचारियों के बीच विवाद का मुख्य कारण बना हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान नियमों के तहत ऐसे मामलों में सीधे नियमितीकरण या अन्य लाभ देना कानूनी और नीतिगत रूप से जटिल हो सकता है।

बैठक में सैनिक कल्याण विभाग की ओर से जारी पूर्व शासनादेशों का भी उल्लेख किया गया। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान नीति के अनुसार चरणबद्ध लाभ केवल उन्हीं उपनल कर्मियों को दिए जा सकते हैं जो निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक बिना किसी व्यवधान के लगातार सेवा में रहे हों। सरकारी अधिकारियों का तर्क है कि यदि सेवा में व्यवधान वाले कर्मचारियों को भी समान लाभ प्रदान किए जाते हैं तो इससे स्थापित नियमों और नीतियों पर सवाल खड़े हो सकते हैं। साथ ही अन्य विभागों में कार्यरत उपनलकर्मियों द्वारा भी इसी प्रकार की मांगें उठने की संभावना बढ़ जाएगी।

बैठक में यह भी माना गया कि यदि बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नियमितीकरण, एरियर और अन्य सेवा लाभ दिए जाते हैं तो इसका व्यापक वित्तीय प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा अन्य विभागों में समान मामलों की संख्या बढ़ने से प्रशासनिक स्तर पर भी नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। अधिकारियों ने आशंका जताई कि एक विभाग में लिया गया निर्णय भविष्य में अन्य विभागों के लिए भी उदाहरण बन सकता है, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने की संभावना है। इन्हीं सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने हाईकोर्ट के आदेशों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। शासन चाहता है कि इस मामले में स्पष्ट कानूनी व्याख्या और अंतिम मार्गदर्शन प्राप्त हो ताकि भविष्य में समान मामलों के निस्तारण के लिए एकरूप नीति बनाई जा सके। अब राज्य कर विभाग से विस्तृत प्रस्ताव मिलने के बाद सरकार विशेष अनुज्ञा याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देगी। इस मामले पर उपनलकर्मियों की निगाहें भी टिकी हुई हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके भविष्य और सेवा लाभों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

 

 

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