देवभूमि से कैलाश की ओर बढ़े श्रद्धालु, टनकपुर में दूसरे जत्थे का हुआ भव्य अभिनंदन..
उत्तराखंड: आस्था, श्रद्धा और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत नजारा बुधवार को टनकपुर में देखने को मिला, जब कैलाश मानसरोवर यात्रा-2026 के दूसरे जत्थे का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया गया। देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे 47 श्रद्धालुओं ने देवभूमि उत्तराखंड से अपनी पवित्र यात्रा की शुरुआत की। जिला प्रशासन और कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने यात्रियों की सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। टनकपुर पहुंचने पर श्रद्धालुओं का स्वागत उत्तराखंडी संस्कृति के अनुरूप ढोल-नगाड़ों, पुष्पवर्षा और पारंपरिक आतिथ्य के साथ किया गया। स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों ने यात्रियों का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। स्वागत से अभिभूत श्रद्धालुओं ने उत्तराखंड की संस्कृति और लोगों के अपनत्व की सराहना की। यात्रा को लेकर सभी यात्रियों में उत्साह और आध्यात्मिक भाव दिखाई दिया। कैलाश मानसरोवर यात्रा के दूसरे दल में कुल 47 श्रद्धालु शामिल हैं, जिनमें 34 पुरुष और 13 महिलाएं हैं। ये यात्री देश के 11 राज्यों से पहुंचे हैं। जत्थे में राजस्थान के 8, गुजरात के 10, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के 5-5, महाराष्ट्र के 6, मध्य प्रदेश के 4, हरियाणा के 3, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड के 2-2 तथा कर्नाटक और तेलंगाना के 1-1 श्रद्धालु शामिल हैं।
यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं
यात्रियों के टनकपुर पहुंचने से पहले ही प्रशासन और केएमवीएन की ओर से ठहरने, भोजन, स्वास्थ्य जांच, परिवहन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों को यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। केएमवीएन अधिकारियों के अनुसार श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और यादगार यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। टनकपुर में रात्रि विश्राम के बाद यह जत्था अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना होगा। कैलाश मानसरोवर यात्रा का यह मार्ग टनकपुर से शुरू होकर पिथौरागढ़, मंच, गूंजी और नाभीढांग होते हुए लिपुलेख दर्रे तक पहुंचता है। इसके बाद श्रद्धालु पवित्र कैलाश मानसरोवर के दर्शन के लिए आगे बढ़ते हैं। यात्रा मार्ग की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन, आवास, सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। यात्रा के सफल संचालन में केएमवीएन, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की अहम भूमिका रहेगी।
10 जत्थे करेंगे कैलाश मानसरोवर यात्रा
इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए कुल 10 जत्थों का संचालन किया जाएगा। सभी जत्थे टनकपुर मार्ग से होते हुए पवित्र यात्रा पूरी करेंगे। इससे पहले पहले जत्थे को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। यात्रा मार्ग पर सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें। टनकपुर में दूसरे जत्थे के स्वागत के दौरान उत्तराखंड की धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। ढोल-नगाड़ों की गूंज और स्थानीय लोगों के उत्साह ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने भी इस स्वागत को अपनी यात्रा की खास स्मृति बताया और उत्तराखंड के आतिथ्य की प्रशंसा की।
