राज्य आंदोलनकारियों के लंबित मामलों के निस्तारण की तैयारी, कैबिनेट उप-समिति बनाएगी सरकार..
उत्तराखंड: उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों से जुड़े वर्षों पुराने लंबित मामलों के समाधान की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल ने बताया कि आंदोलनकारियों की विभिन्न मांगों और समस्याओं के निस्तारण के लिए कैबिनेट स्तर पर एक उप-समिति गठित किए जाने पर सहमति बनी है। यह समिति संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा कर समाधान का रास्ता तैयार करेगी और अपनी संस्तुतियां मुख्यमंत्री को सौंपेगी। शासन स्तर पर गृह सचिव शैलेश बगोली की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राज्य आंदोलनकारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण और लंबे समय से लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में आंदोलनकारी प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष विभिन्न मांगें रखते हुए शीघ्र निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
त्रिपक्षीय वार्ता के जरिए निकलेगा समाधान
बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि प्रस्तावित कैबिनेट उप-समिति राज्य आंदोलनकारी प्रतिनिधियों, संबंधित विभागों और शासन के अधिकारियों के साथ त्रिपक्षीय वार्ता करेगी। इसके बाद तैयार प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा, ताकि विभिन्न मामलों पर जल्द निर्णय लिया जा सके। आंदोलनकारियों का कहना है कि कई मुद्दे वर्षों से लंबित हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में पात्र लोगों को अब तक उनका अधिकार नहीं मिल पाया है। ऐसे में उप-समिति का गठन समाधान की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। बैठक के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा उन जिलों का रहा, जहां अब तक राज्य आंदोलनकारियों का विधिवत चिह्नीकरण पूरा नहीं हो सका है। प्रतिनिधियों ने कहा कि चिह्नीकरण की प्रक्रिया पूरी न होने से कई आंदोलनकारी सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने से वंचित हैं। इसके साथ ही राज्य आंदोलनकारियों को मिलने वाले 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि आरक्षण का लाभ सभी पात्र आंदोलनकारियों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए। बैठक में वर्ष 2011-12 की भर्ती प्रक्रियाओं में सफल रहे राज्य आंदोलनकारियों को अब तक नियुक्ति नहीं मिलने का मामला भी रखा गया। इस विषय पर संबंधित विभागों से आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की गई।
चयन बोर्ड के दायरे से बाहर की संस्थाओं का मुद्दा भी उठा
प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि कैबिनेट के पूर्व आदेशों में अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के अतिरिक्त अन्य भर्ती संस्थाओं को शामिल नहीं किया गया था, जिसके कारण कई अभ्यर्थी लाभ से वंचित रह गए। इस व्यवस्था में संशोधन कर सभी संबंधित संस्थाओं को शामिल किए जाने की मांग भी बैठक में उठाई गई। इसके साथ ही राज्य आंदोलनकारियों ने आयु सीमा में आवश्यक छूट देने, लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण तथा प्रस्तावित समिति को पर्याप्त अधिकार देने की भी मांग रखी, ताकि लिए गए निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। बैठक के बाद आंदोलनकारी प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र ठोस निर्णय लेगी। उनका कहना है कि उत्तराखंड राज्य गठन के आंदोलन में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों से जुड़े मामलों का समयबद्ध निस्तारण होना चाहिए। बैठक में राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पदाधिकारियों के अलावा वन्यजीव प्रतिपालक राजीव तलवार, ललित जोशी, प्रदीप कुकरेती, अंबुज शर्मा, संतन सिंह रावत, पीसी जोशी सहित अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी ने राज्य आंदोलनकारियों के हितों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करते हुए जल्द समाधान की आवश्यकता पर बल दिया
