विकासनगर गोलीकांड- सुसाइड नोट से सामने आई कहानी, पुलिस खंगाल रही प्रेम संबंध और विवाद का एंगल
उत्तराखंड: देहरादून के विकासनगर में हाल ही में हुए सनसनीखेज गोलीकांड की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। घटना स्थल से बरामद एक कथित सुसाइड नोट ने पुलिस जांच की दिशा बदल दी है। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों से संकेत मिल रहे हैं कि मामला एकतरफा लगाव, टूटते रिश्ते, भावनात्मक तनाव और निजी परेशानियों से जुड़ा हो सकता है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है। घटना बीते बुधवार को विकासनगर क्षेत्र के कल्याणपुर स्थित एक किराये के मकान में हुई। स्थानीय लोगों ने कमरे से गोली चलने की आवाज सुनने के बाद पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने कमरे का दरवाजा खोलकर देखा तो अंदर एक युवक और एक महिला गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़े थे।
युवक की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जबकि गंभीर रूप से घायल महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार महिला की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
सुसाइड नोट बना जांच का अहम आधार
घटनास्थल की तलाशी के दौरान पुलिस को मृतक के बैग से दो पन्नों का एक कथित सुसाइड नोट मिला। जांच अधिकारियों के अनुसार नोट में मृतक ने भावनात्मक बातें लिखते हुए यह इच्छा जताई थी कि यदि दोनों की मौत हो जाए तो उनका अंतिम संस्कार एक साथ किया जाए। नोट में महिला के उससे दूरी बनाने का उल्लेख भी किया गया है। पुलिस इस दस्तावेज की सत्यता की जांच कर रही है और इसे फोरेंसिक परीक्षण के लिए भी भेजा जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि यह नोट जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन केवल इसी आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जाएगा। पुलिस जांच में सामने आया है कि मृतक और घायल महिला एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे। बताया जा रहा है कि महिला की शादी से पहले दोनों के बीच करीबी संबंध थे। शादी के बाद महिला अपने परिवार के साथ विकासनगर क्षेत्र में रह रही थी। जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों के बीच लंबे समय तक संपर्क बना रहा और मृतक का महिला के घर आना-जाना भी था। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों के बीच हाल के दिनों में क्या परिस्थितियां बनीं और घटना से पहले उनके बीच किस प्रकार की बातचीत या मुलाकात हुई थी।
दूरी बढ़ने के बाद बढ़ा तनाव
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, समय के साथ महिला ने अपने पारिवारिक जीवन और बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए मृतक से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। बताया जा रहा है कि यह फैसला मृतक स्वीकार नहीं कर पाया और लगातार संपर्क बनाए रखने की कोशिश करता रहा। पुलिस फिलहाल कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, डिजिटल चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि दोनों के बीच हाल के दिनों की बातचीत और घटनाक्रम को स्पष्ट किया जा सके।
आर्थिक संकट और निजी जीवन की परेशानियां भी जांच के दायरे में
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मृतक पिछले कई वर्षों से होटल व्यवसाय से जुड़ा था, लेकिन कारोबार में लगातार नुकसान होने के कारण आर्थिक दबाव में था। बताया जा रहा है कि कुछ वर्ष पहले उसकी शादी हुई थी, लेकिन बाद में वैवाहिक संबंध टूट गए और उसका तलाक हो गया। जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि कहीं आर्थिक तनाव और निजी जीवन की समस्याओं ने उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित तो नहीं किया। घटना में जिस हथियार का इस्तेमाल हुआ, उसके संबंध में भी पुलिस जांच कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गोली चलाने के लिए अवैध तमंचे का उपयोग किया गया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार किसने उपलब्ध कराया, वह कहां से लाया गया और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही। इसके अलावा मृतक के आपराधिक रिकॉर्ड और उसके संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
फोरेंसिक और तकनीकी जांच पर जोर
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल से मिले सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित कर लिए हैं। फोरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया गया है और हथियार, कारतूस, सुसाइड नोट तथा अन्य बरामद वस्तुओं की वैज्ञानिक जांच कराई जा रही है। इसके साथ ही पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण कर रही है ताकि घटना के हर पहलू को स्पष्ट किया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच कई स्तरों पर चल रही है और सभी संभावित पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है। सुसाइड नोट, फोरेंसिक रिपोर्ट, महिला के बयान (यदि स्वास्थ्य अनुमति देता है) और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी संभावित कारण को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कर मामले की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जाएगा।

