राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में मुफ्त हेयर ट्रांसप्लांट शुरू..
पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत..
उत्तराखंड: पर्वतीय जिलों के उन लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है, जो लंबे समय से गंजेपन की समस्या से परेशान हैं लेकिन निजी क्लीनिकों के महंगे खर्च के कारण हेयर ट्रांसप्लांट कराने में असमर्थ थे। अब उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल में आधुनिक FUE (फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन) तकनीक से हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू कर दी गई है। सबसे खास बात यह है कि मरीजों को यह महंगी चिकित्सा सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।
निजी अस्पतालों में लाखों का खर्च, यहां सब मुफ्त
आम तौर पर हेयर ट्रांसप्लांट को एक बेहद महंगी कॉस्मेटिक चिकित्सा प्रक्रिया माना जाता है। निजी अस्पतालों या क्लीनिकों में डॉक्टर की फीस, तकनीक और ग्राफ्ट की संख्या के आधार पर इसका खर्च आसानी से डेढ़ लाख से पांच लाख रुपये या उससे भी अधिक तक पहुंच जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों के मरीजों के लिए इतना खर्च उठाना नामुमकिन सा होता था। बेस अस्पताल के डर्मेटोलॉजी (त्वचा रोग) विभाग द्वारा इस सेवा को मुफ्त शुरू किए जाने से अब आम लोग भी इस अत्याधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकेंगे।
क्या है FUE तकनीक और कैसे होता है इलाज?
त्वचा रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती ने बताया कि FUE हेयर ट्रांसप्लांट की सबसे आधुनिक तकनीकों में से एक है। इसमें सिर के उस हिस्से से, जहां बाल मजबूत और सुरक्षित होते हैं, छोटे-छोटे फॉलिक्युलर यूनिट यानी हेयर ग्राफ्ट निकाले जाते हैं और उन्हें गंजेपन से प्रभावित हिस्से में बेहद सावधानी के साथ प्रत्यारोपित किया जाता है। मरीज की जरूरत और गंजेपन के स्तर को देखते हुए सामान्यतः 1 हजार से लेकर 5 हजार तक ग्राफ्ट लगाए जाते हैं। हालांकि, इसके लिए विभाग में पहले विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मरीज की स्थिति का परीक्षण किया जाता है, ताकि यह तय हो सके कि संबंधित मरीज के लिए ट्रांसप्लांट उपयुक्त है या नहीं।
एक डॉक्टर का संकल्प लाया रंग
इस सेवा की शुरुआत के पीछे एक प्रेरणादायक कहानी भी जुड़ी है। एम्स से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. अत्रेयो चक्रवर्ती ने यह ठान लिया था कि वे त्वचा रोग विज्ञान (डर्मेटोलॉजी) के सबसे महंगे माने जाने वाले उपचार को जरूरतमंद और गरीब मरीजों के लिए पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराएंगी। जब उन्हें श्रीनगर बेस अस्पताल में सेवाएं देने का मौका मिला, तो उन्होंने अपने इस संकल्प को सच कर दिखाया। विभाग के अध्यक्ष डॉ. दीपक डिमरी और उनकी पूरी टीम के संयुक्त प्रयासों से आज यह हाई-टेक सेवा पहाड़ों के बीच सुलभ हो गई है।
मरीजों के साथ मेडिकल छात्रों को भी मिलेगा फायदा
इस सुविधा के शुरू होने का लाभ केवल आम मरीजों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राजकीय मेडिकल कॉलेज के यूजी और पीजी स्तर के मेडिकल छात्रों के लिए भी यह किसी वरदान से कम नहीं है। अब छात्र आधुनिक हेयर ट्रांसप्लांट तकनीक, हेयर लॉस के पैटर्न, ग्राफ्ट निकालने और प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया को अपने कॉलेज परिसर में ही व्यावहारिक रूप से सीख और समझ सकेंगे।
गौरतलब है कि बेस अस्पताल के डर्मेटोलॉजी विभाग में पहले से ही फोटोथेरेपी और लेजर तकनीक जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो क्षेत्र के अन्य अस्पतालों में आसानी से नहीं मिलतीं। अब हेयर ट्रांसप्लांट शुरू होने से पर्वतीय जिलों के लोगों को अपने ही क्षेत्र में उच्चस्तरीय चिकित्सा मिलने लगी है, जिससे उन्हें इलाज के लिए बड़े शहरों के महंगे चक्कर काटने से बड़ी राहत मिली है।
