औली में भारत-अमेरिका का सैन्य मिलन, पहाड़ी युद्ध की रणनीति सीखेंगे जवान..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के औली में भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास का 22वां संस्करण शुरू हो गया है। मंगलवार को औली स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में अभ्यास का उद्घाटन किया गया। इस दौरान दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने जवानों को संबोधित किया और संयुक्त प्रशिक्षण की रूपरेखा पर जानकारी साझा की। इस सैन्य अभ्यास में भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। अभ्यास का आयोजन औली के अलावा राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी किया जा रहा है।
पर्वतीय युद्ध कौशल पर रहेगा फोकस
संयुक्त अभ्यास के दौरान दोनों सेनाओं का मुख्य ध्यान पर्वतीय और अर्धपर्वतीय इलाकों में सैन्य अभियानों की क्षमता को मजबूत करने पर रहेगा। पैदल सेना से जुड़े ऑपरेशनों के साथ अलग-अलग परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान दोनों देशों के सैनिक अपनी-अपनी सैन्य रणनीतियों, तकनीकों और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को साझा करेंगे। संयुक्त योजना बनाने से लेकर अभियान को जमीन पर लागू करने तक की गतिविधियों के जरिए दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। अभ्यास के दौरान चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में ऑपरेशन करने की क्षमता को परखा जाएगा। अलग-अलग भू-भाग में सैनिकों के बीच समन्वय, अभियान की योजना और उसे प्रभावी तरीके से लागू करने का अभ्यास किया जाएगा। इसका एक उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी, यानी संयुक्त रूप से प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को बढ़ाना भी है।
ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम का होगा इस्तेमाल
इस बार सैन्य अभ्यास में आधुनिक तकनीक पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। निगरानी और टोही अभियानों के दौरान ड्रोन तथा स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाएगा। राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों से संबंधित गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। दोनों देशों के विशेषज्ञ नई सैन्य तकनीकों और बहु-क्षेत्रीय युद्ध के बदलते स्वरूप पर अपने अनुभव साझा करेंगे। उद्घाटन समारोह के दौरान अमेरिकी सेना की 14वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन और 11वीं एयरबोर्न डिवीजन की पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के कमांडर कर्नल बेंजामिन जैकमैन ने अभ्यास में शामिल सैन्य दलों को संबोधित किया। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के जवान संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा लेने के साथ अपनी कार्यप्रणाली और अनुभव भी साझा करेंगे। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में अभियान संचालन से जुड़ी क्षमताओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

