उत्तराखंड में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों को केंद्र की बड़ी सौगात, पांच संवेदनशील स्थानों पर होगा स्थायी उपचार..
उत्तराखंड: प्रदेश में लगातार हो रहे भूस्खलनों की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत देते हुए 125 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत पहले चरण में साढ़े चार करोड़ रुपये की राशि डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने के लिए जारी कर दी गई है। यह प्रस्ताव राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) और उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र द्वारा तैयार कर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को भेजा गया था। केंद्र की मंजूरी के बाद अब प्रदेश में मनसा देवी पहाड़ी सहित चार अन्य संवेदनशील स्थलों पर भूस्खलन रोकने के लिए कार्यवाही की जाएगी। मनसा देवी पहाड़ी, जो हरिद्वार में स्थित है, कांवड़ यात्रा के दौरान एक वैकल्पिक मार्ग के रूप में प्रयोग होती है।
इस क्षेत्र में हर साल बरसात के दौरान भूस्खलन का खतरा बना रहता है, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा पर असर पड़ता है। अब मंजूर की गई योजना के अंतर्गत, इन संवेदनशील इलाकों में स्थायी उपचार, ढलान स्थिरीकरण, ड्रेनेज सुधार और भू-तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे। डीपीआर तैयार होने के बाद आगे के चरणों में ठोस निर्माण और नियंत्रण कार्य शुरू किया जाएगा। यह योजना न केवल भूस्खलन की समस्या को स्थायी समाधान की ओर ले जाएगी, बल्कि पर्यटन, तीर्थ यात्रा और स्थानीय आवागमन को भी सुरक्षित और सुगम बनाएगी।
इस योजना के तहत जिन पांच स्थलों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें हरिद्वार स्थित मनसा देवी पहाड़ी, मसूरी का गलोगी जलविद्युत परियोजना मार्ग, नैनीताल स्थित चार्टन लॉज क्षेत्र, कर्णप्रयाग का बहुगुणा नगर और पिथौरागढ़ जिले का खोतिला-घटधार क्षेत्र शामिल हैं।राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र द्वारा तैयार प्रस्तावों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिल चुकी है।
सीएम धामी ने इस सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में दीर्घकालिक समाधान की दिशा में निर्णायक पहल है। सीएम ने यह भी कहा कि इन पांच अत्यधिक प्रभावित स्थलों का चयन प्राथमिकता के आधार पर किया गया है और डीपीआर तैयार होते ही भूस्खलन नियंत्रण का कार्य तेज़ी से शुरू होगा। यह योजना न केवल आमजन की सुरक्षा बल्कि राज्य के पर्यटन और आवागमन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।