देवप्रयाग में शराब ठेके को लेकर विवाद बढ़ा, बहसबाजी के बाद मौके पर तनाव..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के टिहरी जनपद के देवप्रयाग क्षेत्र में प्रस्तावित शराब के ठेके को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन उस समय अचानक तेज हो गया, जब मौके पर मौजूद आबकारी विभाग के अधिकारियों और एक पूर्व ग्राम प्रधान के बीच तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि मौके पर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई और स्थानीय लोगों तथा पुलिस के बीच भी तीखी नोकझोंक देखने को मिली। हालात को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर तैनात करना पड़ा। हालांकि बाद में प्रशासन और पुलिस की समझाइश के बाद स्थिति को किसी तरह शांत कराया गया।
जानकारी के अनुसार देवप्रयाग क्षेत्र में शराब के ठेके को लेकर पिछले कुछ समय से स्थानीय लोग विरोध जता रहे हैं। लोगों का कहना है कि धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में शराब का ठेका खोले जाने से तीर्थ नगरी की गरिमा प्रभावित होगी। इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्र के लोग लगातार आवाज उठा रहे हैं और ठेके को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसी क्रम में पूर्व ग्राम प्रधान नेत्र सिंह भी मौके पर पहुंचे और आबकारी विभाग के अधिकारियों से शराब के ठेके की वैधता तथा उससे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई और देखते ही देखते मामला गरमा गया। आरोप लगाया जा रहा है कि बहस के दौरान कथित तौर पर धक्का-मुक्की भी हुई और पूर्व ग्राम प्रधान के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। यह भी आरोप सामने आए कि उन्हें जबरन वहां से हटाने का प्रयास किया गया।
इस घटना के बाद वहां मौजूद ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों में आक्रोश फैल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि के साथ सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। घटना से नाराज ग्रामीणों ने सरकार से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को लोगों को शांत कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालात को देखते हुए एहतियात के तौर पर मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
वहीं इस मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद मेवाड़ का कहना है कि देवप्रयाग वह पवित्र स्थल है जहां भागीरथी और अलकनंदा नदियों का संगम होकर गंगा का उद्गम होता है, जिसे पूरे देश में अत्यंत पवित्र माना जाता है। उनका कहना है कि जिस स्थान को करोड़ों लोग आस्था और श्रद्धा के साथ देखते हैं, वहां से महज एक किलोमीटर की दूरी पर शराब का ठेका होना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के कई प्रमुख तीर्थ स्थलों के आसपास शराब की बिक्री पर प्रतिबंध या कड़े नियम लागू हैं, ऐसे में देवप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के पास ठेका खोला जाना लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर सकता है। उनका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर स्थानीय जनता लगातार विरोध जता रही है और ठेके को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग कर रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
बताया जा रहा है कि संबंधित शराब के ठेके का वार्षिक नवीनीकरण भी होना है। इसी को लेकर स्थानीय लोग पहले से ही विरोध दर्ज करा रहे हैं। इसी सिलसिले में पूर्व ग्राम प्रधान नेत्र सिंह ठेके से जुड़े दस्तावेजों और उसकी वैधता की जानकारी लेने पहुंचे थे, जहां कथित तौर पर यह पूरा विवाद खड़ा हो गया।इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें बहसबाजी और मौके की स्थिति दिखाई दे रही है। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है। वहीं स्थानीय लोग अब भी इस मुद्दे को लेकर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और ठेके को हटाने या अन्य स्थान पर शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं।

