निजी स्कूलों में 25% सीटों पर मुफ्त प्रवेश, अब तक 847 बच्चों ने किया आवेदन..
उत्तराखंड: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया इस वर्ष भी शुरू हो चुकी है। हालांकि, निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अब तक अपेक्षा से काफी कम आवेदन मिलने से शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ गई है। आरटीई के प्रावधानों के अनुसार निजी विद्यालयों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपनी कुल सीटों का 25 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखें। इसके लिए हर साल शिक्षा विभाग की ओर से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी और अन्य कारणों के चलते कई स्कूलों में ये सीटें खाली रह जाती हैं।
इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से संचालित की जा रही है। अब तक कुल 847 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्तर पर की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, आवेदन के साथ जमा किए गए दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही पात्र बच्चों को संबंधित निजी स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पात्रता के अनुरूप दस्तावेज सही पाए जाने पर बच्चों को प्राथमिक कक्षाओं, विशेषकर कक्षा एक में प्रवेश दिया जाएगा। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।
बालिकाओं को विशेष प्राथमिकता..
आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया में बालिकाओं को भी प्राथमिकता दी जाती है। नियमों के मुताबिक, 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों में से करीब 50 प्रतिशत तक सीटें बालिकाओं के लिए सुनिश्चित की जाती हैं, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक संतुलन को बढ़ावा मिल सके। शिक्षा विभाग का मानना है कि कम आवेदन आने के पीछे जागरूकता की कमी एक बड़ा कारण है। कई अभिभावकों को अभी भी इस योजना की जानकारी नहीं है, जिसके चलते वे अपने बच्चों के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए समय रहते आवेदन करें। साथ ही, अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार बढ़ाएं, ताकि अधिक से अधिक पात्र बच्चे इस योजना का लाभ उठा सकें। फिलहाल, आवेदन प्रक्रिया जारी है और आने वाले दिनों में संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

