धराली आपदा बनी चेतावनी, अब हर ग्लेशियर की होगी वैज्ञानिक निगरानी- सीएम धामी..
उत्तराखंड: धराली आपदा के बाद प्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार यानि 15 अगस्त को ऐलान किया कि राज्य के सभी हिमालयी ग्लेशियरों, विशेष रूप से गंगोत्री ग्लेशियर और उसके आसपास के क्षेत्रों का नियमित वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में आपदाओं के पूर्वानुमान में मदद मिलेगी और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। सीएम धामी ने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग को और अधिक संसाधनयुक्त एवं दक्ष बनाया जाएगा, ताकि सक्रिय और प्रभावी तरीके से आपदाओं से निपटा जा सके। सीएम ने हाल की आपदाओं में प्रभावित हुए धराली और अन्य क्षेत्रों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की।
उन्होंने कहा कि सरकार हर संभव राहत और पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम धामी ने घोषणाएं कि हैं की हिमालयी ग्लेशियरों का नियमित अध्ययन किया जायेगा। साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग को और सशक्त किया जाएगा।प्रभावित परिवारों को दी जाएगी शीघ्र राहत। भविष्य की आपदाओं को लेकर पूर्व चेतावनी प्रणाली मजबूत की जाएगी। वैज्ञानिक संस्थानों से सहयोग लेकर डेटा आधारित रणनीति बनाई जाएगी। सीएम ने साफ कहा कि उत्तराखंड के भौगोलिक हालात को देखते हुए अब विज्ञान, प्रौद्योगिकी और तैयारी को केंद्र में रखकर ही आपदा प्रबंधन की दिशा तय की जाएगी।
उत्तराखंड को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार एक और कदम आगे बढ़ा रही है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रदेश में योग, आयुर्वेदिक चिकित्सा और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में एक-एक “स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन” (Spiritual Economic Zone) बनाया जा रहा है। यह पहल ‘विकसित उत्तराखंड’ के मंत्र के तहत राज्य की आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक प्रगति के लिए की जा रही है। इन ज़ोनों के जरिए आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग साधना केंद्र, आध्यात्मिक रिट्रीट और वेलनेस टूरिज्म के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। सीएम ने यह भी कहा कि यह पहल प्रदेश के ग्लोबल योग और वेलनेस डेस्टिनेशन बनने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।