ऑपरेशन कालनेमि, अब होगी गिरफ्तारी, मुकदमे दर्ज करने के निर्देश जारी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में पहचान छिपाकर लोगों को गुमराह करने वालों के खिलाफ चल रहे “ऑपरेशन कालनेमि” को अब और अधिक सख्ती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। राज्य सरकार के गृह विभाग ने सोमवार को अपराधों का वर्गीकरण करते हुए पुलिस को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत अब छद्म वेशधारी व्यक्तियों पर विभिन्न कानूनों के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा सकेंगे। अब तक ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा सिर्फ शांति भंग की आशंका में हिरासत में लिया जाता था, लेकिन नए निर्देशों के बाद अब गिरफ्तारी और अभियोग दर्ज करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। गृह विभाग ने पुलिस से कहा है कि वह इन निर्देशों का पालन करते हुए कार्रवाई करे और इसके संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता सतर्क रहे और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दे सके। बता दे कि सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर ‘ऑपरेशन कालनेमि’ की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य फर्जी पहचान, छद्म वेश और धोखाधड़ी से लोगों को गुमराह करने वालों की पहचान और गिरफ्तारी करना है। हाल के हफ्तों में इस अभियान के तहत राज्य के कई जिलों से संदिग्धों की धरपकड़ की गई है।
उत्तराखंड में “ऑपरेशन कालनेमि” के तहत छद्म वेशधारियों पर चल रही कार्रवाई ने कई गंभीर आपराधिक गतिविधियों को उजागर किया है। खासतौर पर साधु और तांत्रिक वेश में घूम रहे लोगों की जांच में यह सामने आया है कि कई लोग चमत्कारी उपचार, अपहरण, दुष्कर्म, साइबर ठगी और विवाह के नाम पर धोखाधड़ी जैसे मामलों में शामिल पाए गए हैं। इन मामलों में धार्मिक आड़ लेकर लोगों को मानसिक और आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया गया। कई केसों में महिलाओं और युवतियों को चमत्कार और विवाह का झांसा देकर शारीरिक शोषण तक की घटनाएं सामने आईं। इन चौंकाने वाले खुलासों के बाद, गृह सचिव शैलेश बगौली ने सोमवार को सभी जिला पुलिस और प्रशासन को निर्देश जारी करते हुए कहा कि ऐसे सभी मामलों में कठोर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएं और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा न जाए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था का दुरुपयोग कर अपराध करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, जिससे जनता का विश्वास न टूटे। गृह विभाग ने निर्देशित किया है कि जनता को सतर्क किया जाए, ताकि वह धार्मिक या चमत्कारिक दिखने वाले झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
उत्तराखंड में छद्म वेशधारियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन कालनेमि को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब सोशल मीडिया और जनजागरूकता अभियान का सहारा लिया जाएगा। गृह सचिव शैलेश बगौली ने इस संबंध में सोमवार को सभी जिला प्रशासन और पुलिस को निर्देश जारी किए हैं। गृह सचिव ने कहा कि धार्मिक वेश में अपराध कर रहे लोगों के जाल से लोगों को बचाने के लिए सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार किया जाए। साथ ही गांवों, कस्बों और शहरों में स्थानीय स्तर पर भी जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि कोई भी व्यक्ति अंधविश्वास या चमत्कारी झांसे में आकर अपना आर्थिक या मानसिक नुकसान न करवाए। ऑपरेशन कालनेमि के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गृह सचिव ने मुख्यालय स्तर पर प्रतिदिन रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। यह रिपोर्ट हर दिन शासन को नियमानुसार भेजी जाएगी, जिससे अभियान की निगरानी और मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके। गृह विभाग का मानना है कि इस तरह के अपराध सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी बेहद खतरनाक हैं। इन पर न केवल कठोर कार्रवाई, बल्कि जन जागरूकता भी जरूरी है।
अपराध की प्रकृति और कानून जिसमें होनी है कार्रवाई..
छद्म पहचान बनाकर धोखे की मंशा से धार्मिक वेशभूषा पहनकर लोगों को भ्रमित करना – बीएनएस की धाराओं में।
किसी औषधि व उसके चमत्कारिक उपचार के संबंध में भ्रामक जानकारी देना – औषधि व चमत्कारिक (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम-1954।
विज्ञापनों के माध्यम से अपराध – बीएनएस की धाराओं में।
इलेक्ट्रॉनिक, साइबर धोखाधड़ी, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल – बीएनएस व आईटी एक्ट।
जाली चित्रों को सोशल मीडिया पर प्रकाशित करने की धमकी – बीएनएस व आईटी एक्ट।
फर्जी दस्तावेज के आधार पर देश में निवास कर रहे विदेशी नागरिक – बीएनएस व विदेशियों विषयक अधिनियम-1946।
फर्जी पहचानपत्र बनाना, झूठे कथन करना – बीएनएस की धाराओं में।
जाली दस्तावेज के आधार पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेना – बीएनएस की धाराओं में।