उत्तराखंड का सबसे बड़ा वन्यजीव घोटाला! पूर्व DFO पर केस चलाएगी CBI, सीएम ने दी मंजूरी..
उत्तराखंड: विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट टाइगर सफारी निर्माण में हुए बहुचर्चित घोटाले की जांच में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। राज्य सरकार ने तत्कालीन डीएफओ कालागढ़ अखिलेश तिवारी पर मुकदमा चलाने की सीबीआई को अनुमति दे दी है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अभियोजन की अनुमति प्रदान की है। मामला करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है, जो कॉर्बेट नेशनल पार्क में प्रस्तावित टाइगर सफारी के निर्माण के दौरान सामने आया था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इस घोटाले की विवेचना कर रही है और पूर्व में साक्ष्यों के आधार पर तत्कालीन डीएफओ की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। सीबीआई ने सरकार से अभियोजन स्वीकृति मांगी थी, जिस पर सीएम धामी ने अब मुहर लगा दी है।
अब सीबीआई, अखिलेश तिवारी के खिलाफ संगत धाराओं में आपराधिक मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर सकेगी। जांच में सामने आया कि टाइगर सफारी के निर्माण के नाम पर बिना वैधानिक स्वीकृति और पर्यावरणीय अनुमति के कई कार्य कराए गए। निर्माण कार्यों में नियमों की खुली अनदेखी हुई और भारी-भरकम बजट में घोर वित्तीय अनियमितताएं बरती गईं।बता दे कि यह घोटाला 2021 में प्रकाश में आया था, जब वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने सफारी के निर्माण को अनधिकृत और पर्यावरणीय मानकों के विरुद्ध बताया था। इसके बाद शासन ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीएम पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने लगातार भ्रष्टाचार पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति को दोहराया है। इस निर्णय को सरकार की उसी नीति के तहत बड़ा कदम माना जा रहा हैं।
वहीं, पाखरो टाइगर सफारी निर्माण में अनियमितताओं से संबंधित प्रकरण में तत्कालीन डीएफओ कालागढ़ टाइगर रिजर्व लैंसडौन किशन चंद के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 19 एवं दंड संहिता की धारा 197 के तहत अभियोग चलाने की अनुमति दे दी गई है। पाखरो टाइगर सफारी निर्माण में अनियमितताओं के मामले में उत्तराखंड सरकार ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने तत्कालीन डीएफओ कालागढ़ टाइगर रिजर्व लैंसडौन, किशन चंद के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति दे दी है। इस संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 19 और भारतीय दंड संहिता की धारा 197 के अंतर्गत मुकदमा चलाया जाएगा। यह मामला भी बहुचर्चित जिम कॉर्बेट टाइगर सफारी घोटाले से जुड़ा है, जिसमें करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे।