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पीड़ितों के लिए बना ‘आपदा प्रबंधन जन मंच’, 80 से अधिक स्वयंसेवक हैं जुड़े..

Admin by Admin
2025-08-13
in उत्तराखंड
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पीड़ितों के लिए बना ‘आपदा प्रबंधन जन मंच’, 80 से अधिक स्वयंसेवक हैं जुड़े..
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पीड़ितों के लिए बना ‘आपदा प्रबंधन जन मंच’, 80 से अधिक स्वयंसेवक हैं जुड़े..

 

 

उत्तराखंड: आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील उत्तराखंड में 2007 में राज्य की पहली निर्वाचित सरकार ने उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना की थी। यह पहल देश में अपनी तरह की पहली थी, लेकिन विडंबना यह है कि पिछले दो दशकों में विभाग खुद ही आपदा जैसी चुनौतियों से उबरने में संघर्ष करता रहा है। ऐसे माहौल में उत्तरकाशी के लोगों ने खुद एक अनोखी पहल शुरू की और “उत्तरकाशी आपदा प्रबंधन जन मंच” का गठन कर दिया। यह मंच अब पीड़ितों, वित्तीय सहायता एजेंसियों और सरकार के बीच सेतु का काम कर रहा है, जिससे प्रभावित लोगों तक सही और समय पर मदद पहुंच रही है। उत्तरकाशी आपदा प्रबंधन जन मंच से जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, 20 से अधिक सामाजिक संगठन, 80 से अधिक स्वयंसेवक, छात्र संगठन, वकील, जिला प्रशासन, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और जनप्रतिनिधि जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि इस मंच ने आपदा राहत के काम में पारदर्शिता और तेजी दोनों को सुनिश्चित किया है।

आपदा राहत कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्ध मदद सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तरकाशी के लोगों ने 2010 में “उत्तरकाशी आपदा प्रबंधन जन मंच” का गठन किया। मंच के अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि इस पहल की जड़ें वर्ष 1997 की उस त्रासदी में हैं, जब उनके गांव बागी में भीषण आपदा आई थी और पूरा गांव धंस गया था। उस समय सरकार से लेकर कई सामाजिक संगठन राहत कार्य के लिए पहुंचे थे, लेकिन कम ही जरूरतमंदों तक सहायता पहुंच पाई। इस अनुभव ने एक ऐसे संगठन की जरूरत महसूस कराई जो पीड़ितों, सामाजिक संस्थाओं और सरकार के बीच प्रभावी सेतु का काम कर सके। यही सोच आगे चलकर 2010 में “उत्तरकाशी आपदा प्रबंधन जन मंच” के रूप में साकार हुई। आज यह मंच राहत और बचाव अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसमें कई सामाजिक संगठन, स्वयंसेवक, पत्रकार, जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन शामिल हैं।

हर पीड़ित की मदद के लिए आगे रहा.
आपदा राहत कार्यों में अक्सर देखा जाता है कि संकट के समय तो कई संस्थाएं और लोग पीड़ितों की मदद के लिए आगे आते हैं, लेकिन कुछ समय बाद वे अपने हाल पर छोड़ दिए जाते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए “उत्तरकाशी आपदा प्रबंधन जन मंच” लगातार सक्रिय है। मंच के अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि मंच पीड़ितों की बदलती जरूरतों पर नजर रखते हुए सरकार और वित्तीय सहायता एजेंसियों से संपर्क करता है, ताकि लंबे समय तक मदद सुनिश्चित की जा सके। यही वजह है कि 2012-13 की आपदा हो या कोरोनाकाल, मंच हर संकट में पीड़ितों के साथ खड़ा रहा है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यह मंच न केवल राहत पहुंचाने में बल्कि प्रभावित परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। इसकी वजह से कई पीड़ित परिवार आज फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सके हैं। सेमवाल ने कहा कि केदारनाथ आपदा के दौरान मंच ने न केवल बिछड़े लोगों को अपनों से मिलाने में मदद की, बल्कि उनकी तलाश में आने वाले परिजनों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की थी। आपदा प्रभावितों को समुचित सुविधा देने में मंच के सभी स्वयंसेवक लगातार जुटे रहे। यही जज़्बा धराली आपदा में भी देखने को मिल रहा है, जहां मंच के सदस्य प्रभावित गांवों तक पहुंचकर जरूरतमंदों को आवश्यक सामग्री और सहायता पहुंचा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंच ने कई बार यह साबित किया है कि आपदा के समय सरकारी तंत्र के साथ-साथ स्थानीय पहल भी जीवन बचाने और राहत पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

 

 

Tags: #brackingnewshindinewsuttarakhandnewsuttarakhandpageउत्तरकाशी आपदाउत्तरकाशी आपदा प्रबंधन जन मंच
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