हरेला पर्व पर देहरादून बनेगा हराभरा, 15.50 लाख पौधे और हरित कंट्रोल रूम की तैयारी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला को इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के बड़े अभियान के रूप में मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर इस बार हरेला पर्व को पहले से अधिक व्यापक और विशेष स्वरूप दिया जा रहा है। देहरादून जिले में एक महीने तक चलने वाले अभियान के दौरान 15.50 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पौधरोपण के साथ-साथ उनकी नियमित निगरानी और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए पहली बार हरित कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने हरेला पर्व की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पौधरोपण केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखना और उन्हें विकसित करना भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को जिम्मेदारी तय करने और नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं।
16 जुलाई से एक माह तक चलेगा विशेष अभियान..
जिलाधिकारी ने कहा कि 16 जुलाई से शुरू होने वाला हरेला पर्व इस बार पूरे एक महीने तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाएगा। अभियान के तहत जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार विशेष प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य केवल हरित क्षेत्र बढ़ाना ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ईको टूरिज्म को भी बढ़ावा देना है। योजना के तहत विभिन्न स्थानों पर क्वालिटी फॉरेस्ट विकसित किए जाएंगे, जहां स्थानीय और उपयोगी प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा। इन वन क्षेत्रों को भविष्य में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना है। अभियान को व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से संचालित करने के लिए प्रत्येक सरकारी विभाग में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी पौधरोपण स्थलों का चयन, कार्ययोजना तैयार करने, पौधों के संरक्षण और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी निभाएगा। जिला प्रशासन ने सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्र में पौधरोपण के लिए उपयुक्त स्थानों का चयन करने और निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न संस्थानों और केंद्रीय एजेंसियों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
आईएमए, ओएनजीसी और आईटीबीपी भी बनेंगे अभियान का हिस्सा
इस बार पौधरोपण अभियान को जनभागीदारी आधारित बनाने के उद्देश्य से आईएमए (भारतीय सैन्य अकादमी), सर्वे ऑफ इंडिया, ओएनजीसी और आईटीबीपी जैसी प्रमुख संस्थाओं को भी जोड़ा जाएगा। इनके सहयोग से बड़े स्तर पर पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। बैठक में वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष लगाए जाने वाले कुल 15.50 लाख पौधों में लगभग 50 प्रतिशत पौधे फलदार और चारा प्रजाति के होंगे। इससे एक ओर पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन और स्थानीय आजीविका को भी लाभ मिलने की संभावना है। वन विभाग ने स्पष्ट किया कि पौधरोपण के बाद उनकी देखभाल को भी प्राथमिकता दी जाएगी। प्रत्येक पौधे के संरक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी तय की जाएगी ताकि अधिकतम पौधे विकसित होकर पेड़ का रूप ले सकें।
पांच वर्षों तक होगी नियमित निगरानी
इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पौधे लगाने के बाद उन्हें छोड़ नहीं दिया जाएगा। जिला प्रशासन ने निर्णय लिया है कि अगले पांच वर्षों तक पौधों की देखभाल, सुरक्षा और विकास की नियमित निगरानी की जाएगी। इसके लिए बनाए जा रहे हरित कंट्रोल रूम के माध्यम से समय-समय पर पौधों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी और संबंधित अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी। जिला प्रशासन ने सभी रेखीय विभागों को निर्देश दिए हैं कि 10 जुलाई तक पौधरोपण से संबंधित सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। इसमें गड्ढों की खुदाई, जैविक खाद की व्यवस्था, ट्री गार्ड की उपलब्धता और पौधों के परिवहन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। वन विभाग के देहरादून, मसूरी, कालसी और चकराता वन प्रभागों के माध्यम से सभी विभागों को आवश्यक पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पौधरोपण अभियान शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाओं का सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। जिला प्रशासन का मानना है कि इस वर्ष हरेला पर्व को केवल एक पारंपरिक उत्सव तक सीमित न रखकर पर्यावरण संरक्षण का जनआंदोलन बनाया जाएगा। यदि अभियान सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में यह मॉडल प्रदेश के अन्य जिलों में भी अपनाया जा सकता है।

