ज्योलीकोट में दूषित पानी की सप्लाई पर एक्शन..
उत्तराखंड: नैनीताल के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति के मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए छह इंजीनियरों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम से जुड़े अधिकारियों पर यह कार्रवाई की गई। मामले में दूषित पानी से लोगों के बीमार पड़ने और दो लोगों की मौत की भी जानकारी सामने आई है। प्रकरण की शिकायत सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए गए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर अधिकारियों की लापरवाही सामने आने पर शासन स्तर से निलंबन की कार्रवाई की गई।
इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
निलंबित अधिकारियों में जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता और अपर सहायक अभियंता शामिल हैं। इसके अलावा पेयजल निगम भीमताल के अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को भी निलंबित किया गया है। वहीं नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को भविष्य में इस तरह की लापरवाही सामने आने पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सीएम की ओर से अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पेयजल और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों से जनता से जुड़े मामलों में गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम करने को कहा गया है। इससे पहले नीट यूजी 2026 की राज्य केंद्रीयकृत काउंसिलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों से जुड़े मामले में भी कार्रवाई की गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अब तक आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं और उनके दाखिले भी रद्द किए गए हैं। साथ ही जांच का दायरा अन्य आरक्षित श्रेणियों के प्रमाणपत्रों तक बढ़ाया गया है।
सीएम ने कहा है कि पेयजल और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर रहना होगा। सरकार की ओर से सभी विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को जनता से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। ज्योलीकोट प्रकरण में हुई कार्रवाई को प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

