2027 से पहले सैनिक परिवारों पर भाजपा की नजर..
OROP और सैनिक सम्मान को बनाया हथियार..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक तैयारियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। इसी कड़ी में भाजपा ने पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर देना शुरू कर दिया है। हल्द्वानी में आयोजित गौरव सेनानी मिलन कार्यक्रम में हजारों पूर्व सैनिकों की मौजूदगी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की उपस्थिति को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तराखंड में सेना से जुड़े परिवारों की बड़ी संख्या है। सैन्य सेवा में रहे लोगों की संख्या राज्य की आबादी का करीब 3.3 प्रतिशत बताई जाती है, जबकि परिवार और रिश्तेदारी के स्तर पर इसका प्रभाव कहीं व्यापक माना जाता है। यही वजह है कि चुनाव से पहले सैनिक और पूर्व सैनिक वर्ग राजनीतिक दलों के लिए अहम हो जाता है। भाजपा इस वर्ग के बीच वन रैंक-वन पेंशन, सैनिक सम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रमुख मुद्दों के तौर पर सामने रख रही है। हल्द्वानी के कार्यक्रम में नितिन नवीन ने भी पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दों के साथ सीमा सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में सरकार के कामकाज को जोड़ा।
OROP और सैनिक सम्मान पर जोर
पूर्व सैनिकों के बीच भाजपा के संपर्क अभियान में वन रैंक-वन पेंशन को प्रमुख उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा है। वर्ष 2015 में लागू हुई OROP व्यवस्था का उद्देश्य समान रैंक और समान सेवा अवधि वाले सैनिकों की पेंशन में अंतर को कम करना था। उत्तराखंड में सेना से जुड़ी मजबूत सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अहम माना जाता है। राज्य सरकार की ओर से भी सैनिकों और उनके परिवारों से जुड़े कई फैसलों को लगातार सामने रखा जा रहा है। शहीदों के गांवों में उनकी प्रतिमाएं लगाने, मृतक आश्रितों से जुड़े मामलों में राहत और अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण जैसे फैसलों को इसी कड़ी में देखा जा रहा है। हालांकि अग्निवीर योजना को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठाता रहा है और इसे युवाओं के रोजगार तथा सैन्य भर्ती से जोड़कर मुद्दा बना रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनावी मुद्दे से जोड़ने की कोशिश
हल्द्वानी में नितिन नवीन के संबोधन में सैनिक कल्याण के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रहा। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में सड़क और बुनियादी ढांचे की स्थिति का जिक्र करते हुए मौजूदा सरकार के रक्षा बजट, सीमा सड़क परियोजनाओं और रक्षा निर्यात में हुई प्रगति का उल्लेख किया। कश्मीर और चीन सीमा का जिक्र करते हुए भाजपा की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सैनिकों के सम्मान और कल्याण के साथ देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकता रही है। नितिन नवीन ने अपने पुराने कश्मीर दौरे का जिक्र करते हुए लाल चौक की स्थिति और बाद में वहां तिरंगा फहराए जाने को भी भाजपा सरकार की उपलब्धियों के रूप में सामने रखा। इस तरह सैनिकों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक राजनीतिक नैरेटिव से जोड़ने की कोशिश दिखाई दी।
सैनिक परिवारों तक पहुंच बनाना क्यों अहम?
उत्तराखंड में सैनिक परिवारों का प्रभाव सिर्फ पूर्व सैनिकों तक सीमित नहीं है। इनके परिवार और रिश्तेदार राज्य के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं। ऐसे में किसी एक वर्ग को साधने का असर कई विधानसभा क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। भाजपा की रणनीति में पूर्व सैनिकों से सीधा संवाद, उनके परिवारों तक पहुंच और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को एक साथ जोड़ने की कोशिश नजर आ रही है। पहाड़ी जिलों में सेना से जुड़ी पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए यह रणनीति खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है। 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटने लगे हैं। भाजपा का सैनिक संपर्क अभियान इसी चुनावी तैयारी का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
