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जर्सी पहनने से पहले मिताली ने रोए खून के आंसू..

 कथक छोड़ क्रिकेटर बनने निकली मिताली की कहानी..

Admin by Admin
2022-06-20
in देश-दुनिया
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जर्सी पहनने से पहले मिताली ने रोए खून के आंसू..
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जर्सी पहनने से पहले मिताली ने रोए खून के आंसू..

 कथक छोड़ क्रिकेटर बनने निकली मिताली की कहानी..

देश- दुनिया  : महिला क्रिकेट को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाली भारत की महान महिला बल्लेबाज मिताली राज इन दिनों अपनी बायोपिक ‘शाबाश मिट्ठू’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म का ट्रेलर रिलीज हो गया है। इस फिल्म में मिताली का किरदार अभिनेत्री तापसी पन्नू निभा रही हैं। फिल्म के जरिए लोग मिताली की जिंदगी को बड़े पर्दे पर देख सकेंगे। क्रिकेट भारत में एक ऐसा खेल माना जाता है, जिसकी दीवानगी क्रिकेट प्रेमियों के सिर चढ़कर बोलती है। मगर, यह दीवानगी सिर्फ पुरुष क्रिकेट के लिए ही देखी जाती रही है। महिला क्रिकेट के प्रति यह दीवानगी 90 के दशक तक तो नदारद ही थी। आज के परिदृश्य में भी महिला क्रिकेट को जो कुछ पहचान मिली है, उसका श्रेय ‘लेडी सचिन तेंदुलकर’ मिताली राज को जाता है। पुरुष वर्चस्व वाले क्षेत्र में जब महिला क्रिकेट को पहचान दिलाने का सपना मिताली ने देखा होगा तो यकीनन आसान नहीं रहा होगा। हमारा सामाजिक ढांचा ऐसा है कि मिताली को घर से लेकर क्रिकेट के मैदान तक तमाम विरोध और अड़चनों से गुजरना पड़ा। इस सफर में वह किन संघर्षों से गुजरीं? आइए जानते हैं…

भाई के साथ शुरू किया था अभ्यास..

महिलाओं को टीचिंग और बैंकिंग जैसे क्षेत्र में करियर बनाने का सुझाव देने वाले समाज में जब मिताली ने अपने सपने को साकार करने के लिए हाथ में बल्ला थामा तो उनका आत्मविश्वास डिगाने के लिए कई लोग आए। हालांकि, माता-पिता का सपोर्ट रहा और वह न डरीं न झुकीं। उन्होंने महिला क्रिकेट की दुनिया में जो इतिहास रचा है, आज दुनिया उससे वाकिफ है। इस फिल्म के ट्रेलर में भी दिखाया गया है कि मिताली के किरदार में तापसी पन्नू कहती हैं, ‘आठ साल की थी, जब किसी ने यह सपना दिखाया था कि ‘मैन इन ब्लू’ की तरह हमारी भी एक टीम होगी, ‘वुमन इन ब्लू।’ जब मिताली के भाई मिथुन के कोच मिताली की प्रतिभा के बारे में बताते हुए कहते हैं, ‘इसमें टैलेंट नेचुरल है, अगर प्रॉपर ट्रेनिंग हो गई तो नेशनल खेलने के चांस हैं।’ पूरा परिवार समझता है कि यह तारीफ मिथुन के लिए है, लेकिन कोच कहते हैं, ‘अरे मैं मिताली की बात कर रहा हूं’। इस पर पूरे परिवार का चेहरा उतर जाता हैं।’

कथक में थी रुचि, मगर देखा यह सपना..

मिताली तमिल परिवार से हैं। उनका जन्म 3 दिसंबर 1982 को राजस्थान के जोधपुर शहर में हुआ। मिताली के पिता दोराज राज वायुसेना अधिकारी है। मिताली कथक में एक्सपर्ट थीं, लेकिन इनके माता-पिता ने मिताली को उनके भाई के साथ क्रिकेट का अभ्यास करने भेजना शुरू कर दिया। रिपोर्ट्स की मानें तो मिताली के माता-पिता ने उन्हें भाई के साथ क्रिकेट खेलने इसलिए भेजना शुरू किया था, क्योंकि वह देर तक सोती थीं। फिर मिताली भी भाई मिथुन के साथ जाने लगीं। मिथुन क्रिकेट सीखते थे। तब अक्सर कोच ज्योति प्रसाद खाली समय में नन्ही मिताली के साथ क्रिकेट खेला करते थे। उन्होंने ही मिताली में क्रिकेट खेलने की प्रतिभा को पहचाना था और माता-पिता को उन्हें क्रिकेट सिखाने की सलाह दी थी। वह उनकी देखरेख में छह साल तक प्रशिक्षण लेती रहीं। इसके बाद उन्हें नए कोच संपत कुमार के पास ले जाया गया। यह समय उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया। हालांकि, शुरुआत में मिताली के दादा-दादी को उनका क्रिकेट खेलना पसंद नहीं आया था। उन्हें एक लड़की का खेल में जाने के चुनाव अच्छा नहीं लगा। मगर मिताली के माता-पिता ने पूरा सपोर्ट किया।

17 साल की उम्र में किया आगाज..

मिताली राज ने भारत के लिए अपने क्रिकेट करियर का आगाज 17 बरस की उम्र में किया था। उन्होंने तब वन डे में आयरलैंड के खिलाफ चंद्रकाता कौल की कप्तानी में शतक जमाकर टीम को 161 रन से जिताया था। जिस वक्त मिताली भारतीय टीम के लिए चुनी गईं। उन्हें उस समय एक खिलाड़ी को मिलने वाली आधारभूत सुविधाएं भी नहीं मिलती थीं। वह पुरुष क्रिकेटरों के साथ नेट पर अभ्यास करतीं। यह वह दौर था, जब महिला क्रिकेट बीसीसीआई के अंतर्गत नहीं आता था। मिताली इंडिया के लिए खेल तो रही थीं, पर उन्हें पुरुष क्रिकेट जैसी सुविधा और सम्मान नहीं मिलते थे। उन्हें कई बार बिना रिजर्वेशन ट्रेन में सफर भी करना पड़ा। मिताली मानती हैं कि करियर के शुरुआती दिनों के संघर्ष ने उन्हें मानसिक तौर पर काफी मजबूत बनाया। इन सीखों से आगे के जीवन में मिली कठिनाइयों का सामना करना आसान हो गया। कई बार जीत मिली तो कई बार हार। ट्रेलर में भी दिखाया गया है कि मिताली को क्रिकेट के मैदान किस तरह संघर्ष करना पड़ा। मिताली के किरदार में तापसी कहती नजर आती हैं, ‘हमारी बहुत बेसिक नीड्स हैं। हमारे अपने नाम के कपड़े।’ जब उनके सामने महिला क्रिकेट का मजाक बनाया गया तो वह ठानती हैं कि ऐसी पहचान बनानी है कि कोई भूल न पाए। और मिताली ने सच में ऐसा कर दिखाया।

08 जून को लिया संन्यास..

 भारत की एक पूरी पीढ़ी की लड़कियों को क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित करने वाली बल्लेबाज मिताली राज ने बीते 08 जून को इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी प्रारूपों को अलविदा कह दिया। यह भी एक संयोग है कि 39 बरस की मिताली ने अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट का करियर आगाज 26 जून, 1999 को किया और इसे अलविदा कहने का फैसला आठ जून को लिया। मिताली ने अपने करियर का अंतिम मैच 27 मार्च, 2022 भी आईसीसी वन डे महिला विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कप्तान के रूप में किया और इसमें भारत की टीम भले ही अंतिम गेंद पर तीन विकेट से हार गई, लेकिन इसमें भी उन्होंने 68 रन की शानदार पारी खेली। इस मैच में मिताली ने अर्धशतक जड़ा था। मिताली राज ने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट टेस्ट, वन डे टी -20 में कुल मिलाकर 10868 रन बनाए और इनमें आठ शतक भी शामिल हैं। मिताली अपने जमाने की बेहतरीन फील्डर भी रही और उन्होंने तीनों फॉर्मेट में कुल 93 कैच भी लपके।

2018 में विवाद में भी रहीं..

कोई भी क्रिकेटर दो दशक से भी ज्यादा लंबा खेले और कोई विवाद न रहा हो यह मुमकिन नहीं है। 2018 में वेस्ट इंडीज में टी-20 विश्व कप के दौरान उनकी कोच रमेश पोवार से ठन गई थी। दोनों ने एक-दूसरे पर काफी आरोप भी लगाए थे। इसके बाद पोवार को पद से हटा डब्ल्यूवी रामन को भारत का चीफ कोच बनाया गया। हालांकि इसके बाद जब पोवार को महिला वन डे विश्व कप में फिर भारत का कोच बनाया गया तो दोनों ने एक सुर में कहा कि यह अतीत है और वे इसे भुला चुके हैं। मिताली की करियर गाथा आने वाली पीढ़ियों को बल्ला थामने के लिए प्रेरित करेगी।

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