देहरादून में डीएम ने शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास पर मांगी तेज कार्रवाई..
उत्तराखंड: देहरादून जिले में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर प्रशासन ने निगरानी और कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण इकाई के अध्यक्ष डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 और बाल भिक्षावृत्ति निवारण से जुड़े कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की गई। बैठक में बाल संरक्षण से जुड़े मामलों के साथ बच्चों के पुनर्वास, दत्तक ग्रहण, शिक्षा, स्वास्थ्य, बालश्रम, बाल विवाह और भिक्षावृत्ति की रोकथाम की स्थिति की समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी मामले में बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े मामलों का निस्तारण समयबद्ध तरीके से होना चाहिए। लापरवाही मिलने पर संबंधित की जिम्मेदारी तय करने के भी निर्देश दिए गए। समीक्षा के दौरान सामने आया कि पिछले तीन महीनों में 236 मामले बाल कल्याण समिति के समक्ष पहुंचे, जिनमें से 120 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। संस्थागत बालगृहों में रह रहे छह बच्चों को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त किया गया। वित्तीय वर्ष 2026 में अब तक पांच बच्चों को दत्तक ग्रहण के लिए दिया जा चुका है। वहीं, वर्ष 2016 से अब तक देहरादून जिले से कुल 109 बच्चों को देश और विदेश में दत्तक ग्रहण के लिए दिया गया है।
चाइल्ड हेल्पलाइन पर भी बड़ी संख्या में पहुंचे मामले
चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 की समीक्षा में बताया गया कि अप्रैल से जून के बीच 200 मामले प्राप्त हुए, जबकि जुलाई से अब तक 174 प्रकरण सामने आए हैं। इस दौरान बाल विवाह के दो और बालश्रम से जुड़े 46 मामले भी दर्ज हुए। जिलाधिकारी ने पारिवारिक विवाद और अन्य संवेदनशील मामलों में बच्चों एवं परिवारों की काउंसलिंग के साथ नियमित फॉलोअप करने के निर्देश दिए। जिले में संचालित 19 सरकारी और स्वयंसेवी बालगृहों की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया गया। प्रशासन ने इन संस्थानों में बच्चों के रहने, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप रखने को कहा। समीक्षा अवधि में बालगृहों के 16 निरीक्षण किए गए। इन संस्थानों में काम करने वाले 156 कर्मचारियों में से 138 का पुलिस सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि बाकी कर्मचारियों का सत्यापन जल्द कराने के निर्देश दिए गए।
302 बच्चों के दस्तावेजों की हुई समीक्षा
बालगृहों में रहने वाले 302 बच्चों के दस्तावेजों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जानकारी के अनुसार 236 बच्चों के आधार कार्ड, 95 के आयुष्मान कार्ड और 116 के राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं। वहीं 219 बच्चे वर्तमान में स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। प्रशासन ने शेष बच्चों के जरूरी दस्तावेज तैयार कराने और उन्हें शिक्षा से जोड़ने की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी करने को कहा। बाल भिक्षावृत्ति और बालश्रम के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की समीक्षा में बताया गया कि दिसंबर 2024 से अब तक 744 बच्चों को चिन्हित या रेस्क्यू किया गया है। इनमें 111 बच्चे भिक्षावृत्ति, 173 कूड़ा बीनने, 101 बालश्रम, 307 ड्रॉपआउट और 52 अन्य श्रेणियों से संबंधित हैं। रेस्क्यू किए गए बच्चों में से 216 का स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद कार्रवाई केवल वहीं तक सीमित न रहे। उनके स्कूल में प्रवेश, स्वास्थ्य जांच, काउंसलिंग और पुनर्वास की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए, ताकि बच्चे दोबारा जोखिम की स्थिति में न पहुंचें।
गांव से वार्ड स्तर तक सक्रिय होंगी बाल संरक्षण समितियां..
बैठक में मिशन वात्सल्य की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने ब्लॉक, ग्राम, नगर निकाय और वार्ड स्तर पर गठित बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए। उन्होंने उपलब्ध अनटाइड अनुदान की पांच प्रतिशत धनराशि नियमानुसार बच्चों के कल्याण और सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर खर्च करने को कहा। इसके साथ ही अनाथ और परित्यक्त बच्चों के प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया, दूसरे राज्यों के बच्चों को उनके गृह राज्य भेजने और बच्चों से जुड़े अभिलेखों को नियमित रूप से अपडेट रखने के निर्देश दिए गए। बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट हर्षिता सिंह, जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष नमिता ममगाईं, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, पुलिस क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेंद्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

