SIR अभियान की होगी सख्त मॉनिटरिंग, 4 जिलों में मंडलायुक्त संभालेंगे मोर्चा..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर निर्वाचन विभाग ने निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सोमवार को सचिवालय में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अभियान की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से जुड़े आवेदनों के निस्तारण के साथ फील्ड स्तर पर सत्यापन को लेकर अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अभियान की जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए दोनों मंडलायुक्तों को विशेष रूप से फील्ड विजिट करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत कुमाऊं मंडल के आयुक्त अगले 15 दिनों तक नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों में कैंप करेंगे। वहीं, गढ़वाल मंडल के आयुक्त देहरादून और हरिद्वार में रहकर पुनरीक्षण कार्य की निगरानी करेंगे।
चार जिलों में बूथ स्तर पर होगी विशेष निगरानी
निर्वाचन विभाग के अनुसार दोनों मंडलायुक्त संबंधित जिलों में आयोग की ओर से निर्धारित मानकों के आधार पर फील्ड विजिट करेंगे। इस दौरान खास तौर पर उन मतदान केंद्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित आवेदन सामान्य से अधिक संख्या में प्राप्त हुए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि फील्ड विजिट के दौरान बूथ स्तर पर चल रहे कार्यों की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए। आवेदन प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को निर्धारित नियमों के अनुरूप परखा जाएगा।इसके साथ ही जिलाधिकारियों को भी सुपर-चेकिंग के लिए रैंडम आधार पर फील्ड विजिट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य बूथ स्तर पर चल रहे पुनरीक्षण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
अधिक आवेदन वाले बूथों पर होगी क्रॉस-वेरिफिकेशन
समीक्षा बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ऐसे मतदान केंद्रों की पहचान कर अतिरिक्त सत्यापन करने को कहा है, जहां मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के आवेदन निर्धारित सीमा से अधिक मिले हैं। निर्देश के अनुसार जिन बूथों पर फॉर्म-6 के तहत नाम जोड़ने के आवेदन 4 प्रतिशत से अधिक हैं, वहां आवेदन पत्रों की क्रॉस-वेरिफिकेशन कराई जाएगी। इसी तरह जिन बूथों पर फॉर्म-7 के तहत नाम हटाने के आवेदन 2 प्रतिशत से अधिक प्राप्त हुए हैं, वहां भी इलेक्ट्रोल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) को विशेष सत्यापन करना होगा। इस प्रक्रिया के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि मतदाता सूची में शामिल होने वाले नए नाम और हटाए जाने वाले नामों से संबंधित सभी दावों की जांच नियमों के तहत पूरी तरह हो।
फॉर्म-6, 7 और 8 के आवेदनों के निस्तारण पर जोर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों को फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के तहत प्राप्त आवेदनों की नियमानुसार जांच कर समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने के निर्देश दिए। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म-7 के माध्यम से नाम हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया होती है। वहीं, फॉर्म-8 के जरिए मतदाता सूची में दर्ज जानकारी में सुधार या अन्य निर्धारित बदलाव के लिए आवेदन किया जाता है। अधिकारियों से कहा गया कि प्रत्येक आवेदन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच की जाए और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो। बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिलों को दावे और आपत्तियों के निस्तारण को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
निर्वाचन विभाग की ओर से अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम छूटे नहीं और अपात्र नामों को नियमों के अनुसार हटाने की कार्रवाई की जा सके।चार जिलों में मंडलायुक्तों के कैंप करने और जिलाधिकारियों की ओर से रैंडम सुपर-चेकिंग किए जाने से SIR अभियान की जमीनी निगरानी और मजबूत होने की उम्मीद है। विशेष रूप से अधिक संख्या में फॉर्म-6 और फॉर्म-7 आवेदन वाले बूथों पर क्रॉस-वेरिफिकेशन से मतदाता सूची में होने वाले बदलावों की प्रक्रिया को और अधिक जांच-परख के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। निर्वाचन विभाग का फोकस फिलहाल आवेदन के समयबद्ध निस्तारण के साथ-साथ मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने पर है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और समय सीमा के अनुसार पूरी हो।
