उद्योगों के हित में बड़ा निर्णय, बिजली लोड बढ़ाने पर नहीं लगेगा अतिरिक्त आर्थिक बोझ..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं, विशेषकर उद्योगों और बड़े उपभोक्ताओं को विद्युत भार (लोड) बढ़ाने की प्रक्रिया में बड़ी राहत मिली है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब लोड वृद्धि या नए उच्च वोल्टेज कनेक्शन से जुड़े मामलों में कनेक्टिविटी, पावर सिस्टम स्टडी, टेक्निकल फिजिबिलिटी और अन्य समान प्रकार के अतिरिक्त शुल्क उपभोक्ताओं से नहीं लिए जा सकेंगे। आयोग का यह फैसला एक औद्योगिक इकाई की शिकायत पर सुनवाई के बाद सामने आया है। मामले में आयोग ने संबंधित विद्युत एजेंसियों की प्रक्रियाओं की समीक्षा करते हुए उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
लोड बढ़ाने के आवेदन पर शुरू हुआ विवाद..
काशीपुर स्थित एक औद्योगिक इकाई ने अपने मौजूदा बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ाने के लिए आवेदन किया था। कंपनी पहले से उच्च वोल्टेज स्तर पर बिजली आपूर्ति प्राप्त कर रही थी और उसी स्तर पर अतिरिक्त विद्युत भार की मांग की गई थी। आवेदन के बाद विद्युत वितरण निगम द्वारा प्रोसेसिंग शुल्क लिया गया, जबकि बाद में तकनीकी अध्ययन और कनेक्टिविटी से जुड़े विभिन्न मदों में अतिरिक्त राशि की मांग भी सामने आई। मामला नियामक आयोग तक पहुंचने पर आयोग ने संबंधित संस्थाओं से जवाब तलब किया और पूरे प्रकरण की विस्तृत सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि उपभोक्ता ने उसी वोल्टेज स्तर पर केवल लोड बढ़ाने का अनुरोध किया था। ऐसे मामलों में अलग से कनेक्टिविटी एग्रीमेंट, पावर सिस्टम स्टडी या तकनीकी व्यवहार्यता शुल्क लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता। आयोग की पीठ ने स्पष्ट किया कि विद्युत उपभोक्ताओं को लोड वृद्धि या नए ईएचवी कनेक्शन से संबंधित प्रक्रियाओं में अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं उठाना चाहिए। आयोग ने यह भी माना कि संबंधित मामले में लिया गया प्रोसेसिंग शुल्क नियमों के अनुरूप नहीं था और इसे समायोजित किया जाएगा। इस निर्णय से राज्य के उद्योगों, बड़े वाणिज्यिक उपभोक्ताओं और उच्च क्षमता वाले विद्युत उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। भविष्य में लोड वृद्धि की प्रक्रिया अधिक सरल और कम खर्चीली हो सकेगी।
कुल्हाल जल विद्युत परियोजना के आधुनिकीकरण को मंजूरी..
इसी दौरान आयोग ने देहरादून स्थित 30 मेगावाट क्षमता वाली कुल्हाल जल विद्युत परियोजना के पुनरुद्धार, आधुनिकीकरण और उन्नयन कार्यों को भी सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। लगभग पांच दशक पुरानी इस परियोजना के लिए 120 करोड़ रुपये से अधिक के पूंजी निवेश प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना के आधुनिकीकरण से बिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और संयंत्र की कार्य अवधि कई दशकों तक बढ़ाई जा सकेगी। योजना के तहत मशीनरी और तकनीकी प्रणालियों को आधुनिक बनाया जाएगा, जिससे उत्पादन दक्षता में भी सुधार आने की उम्मीद है।
धरासू सोलर प्रोजेक्ट विवाद पर आयोग सख्त..
उत्तरकाशी जिले में स्थित धरासू सौर ऊर्जा परियोजना से जुड़े विवाद पर भी आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान आयोग ने टिप्पणी की कि परियोजना से जुड़े पक्षों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद की कमी के कारण विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई है।आयोग ने संबंधित एजेंसियों और परियोजना विकासकर्ताओं को आपसी सहमति से समाधान तलाशने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी पक्षों से विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग के हालिया फैसले राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। एक ओर उद्योगों को अतिरिक्त शुल्क से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर पुरानी ऊर्जा परियोजनाओं के आधुनिकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विवादों के समाधान पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इससे राज्य में ऊर्जा अवसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।
