जराल, मंजयारा और काना ताल बनेंगे आकर्षण का केंद्र..
बूढ़ाकेदार को पर्यटन मानचित्र पर लाने की पहल..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में पर्यटन को नए क्षेत्रों तक पहुंचाने की कोशिशों के बीच टिहरी गढ़वाल के बूढ़ाकेदार क्षेत्र से अच्छी संभावनाएं सामने आई हैं। भिलंगना ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले इस इलाके में स्थित जराल ताल, मंजयारा ताल और काना ताल को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की पहल की जा रही है। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर इन स्थलों को ट्रेकिंग के माध्यम से पर्यटकों के सामने लाने की तैयारी है। इसी उद्देश्य से हाल ही में ‘ट्री फॉर हिमालय’ और मंज्याड़ी रिसोर्ट की ओर से ट्रेकिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें स्थानीय ग्रामीणों, छात्र-छात्राओं, ट्रेकिंग प्रेमियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल और भिलंगना के खंड विकास अधिकारी विपिन सिंह भी इस अभियान में शामिल हुए। अधिकारियों ने करीब सात किलोमीटर पैदल चलकर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक आकर्षण और पर्यटन विकास की संभावनाओं को समझा।
हर दो किलोमीटर पर दिखता है प्राकृतिक नजारा
बूढ़ाकेदार के मरवाड़ी गांव से शुरू होने वाला यह ट्रेक अपने प्राकृतिक दृश्यों के लिए खास है। रास्ते में घने जंगल, पहाड़ी ढलान और खुले बुग्याल देखने को मिलते हैं। इस मार्ग पर करीब-करीब हर दो किलोमीटर के अंतराल पर अलग-अलग प्राकृतिक आकर्षण मौजूद हैं। जराल ताल, मंजयारा ताल और काना ताल इस क्षेत्र के प्रमुख आकर्षण हैं। अब तक सीमित लोगों तक ही इन स्थानों की जानकारी पहुंच पाई है, लेकिन ट्रेकिंग गतिविधियों के जरिए इन्हें व्यापक पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है। प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफी के शौकीनों और एडवेंचर टूरिज्म में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए यह क्षेत्र नया विकल्प बन सकता है।
ट्रेकिंग रूट की सूची में शामिल करने की तैयारी
मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने बताया कि बूढ़ाकेदार मंदिर से आगे मरवाड़ी गांव के पास इस ट्रेक का शुरुआती मार्ग है। सड़क से ट्रेक शुरू होने के कारण यहां पर्यटकों की आवाजाही को बढ़ावा देने की अच्छी संभावनाएं हैं उन्होंने कहा कि इस मार्ग को पर्यटन विभाग की ट्रेकिंग रूट सूची में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। निरीक्षण के दौरान जहां-जहां सुधार की जरूरत महसूस हुई है, वहां आवश्यक कार्यों की लागत का आकलन किया जा रहा है। इसके बाद सुविधाओं के विकास के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीडीओ के अनुसार, ‘ट्रेक ऑफ टिहरी’ के माध्यम से होटल और होमस्टे संचालकों को भी इन स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि उनके यहां ठहरने वाले पर्यटकों तक इस ट्रेक की जानकारी पहुंच सके। स्थानीय लोगों की भागीदारी से भी इसे बढ़ावा देने की योजना है।
बुनियादी सुविधाओं के विकास पर जोर
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाएं तो काफी हैं, लेकिन जरूरी सुविधाओं के अभाव में इन प्राकृतिक स्थलों को अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाई है। ट्रेकिंग मार्ग पर सुरक्षित रास्ते, दिशा सूचक बोर्ड, पेयजल, स्वच्छता और प्राथमिक उपचार जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने की जरूरत है। इसके साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा के लिए स्थानीय गाइड की उपलब्धता और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था भी जरूरी होगी। ट्रेकिंग आयोजक बद्री प्रसाद अंथ्वाल का कहना है कि इन खूबसूरत स्थानों को लोगों तक पहुंचाने और स्थानीय प्राकृतिक विरासत से नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। उनके मुताबिक, पर्यटन को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और स्थानीय समुदाय को मिलकर काम करना होगा। क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की कमी नहीं है, जरूरत केवल उन्हें बेहतर पहचान और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।
पर्यटन से ग्रामीणों के लिए खुल सकते हैं रोजगार के रास्ते
यदि इन तीनों तालों को योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाता है तो इसका सीधा लाभ स्थानीय ग्रामीणों को मिल सकता है। युवाओं के लिए स्थानीय गाइड, ट्रेकिंग सहायक और परिवहन सेवाओं में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। वहीं, होमस्टे और पहाड़ी व्यंजनों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ने की संभावना भी है। स्थानीय कृषि उत्पादों और हस्तशिल्प को भी पर्यटकों के बीच बाजार मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी होगा। तालों और बुग्यालों में प्लास्टिक कचरे पर नियंत्रण, उचित अपशिष्ट प्रबंधन और जिम्मेदार पर्यटन की व्यवस्था करनी होगी।
कैसे पहुंचें बूढ़ाकेदार?
बूढ़ाकेदार टिहरी गढ़वाल के भिलंगना क्षेत्र में स्थित है और सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। देहरादून या ऋषिकेश से चंबा, नई टिहरी और घनसाली होते हुए बूढ़ाकेदार पहुंचा जा सकता है। देहरादून से इसकी दूरी लगभग 160 से 180 किलोमीटर है। पहाड़ी रास्तों के कारण यात्रा में पांच से सात घंटे या इससे अधिक समय लग सकता है। रेल मार्ग से आने वाले पर्यटक ऋषिकेश तक ट्रेन से पहुंच सकते हैं, जबकि हवाई यात्रा के लिए जौलीग्रांट एयरपोर्ट नजदीकी प्रमुख विकल्प है। बूढ़ाकेदार पहुंचने के बाद मरवाड़ी गांव से जराल ताल, मंजयारा ताल और काना ताल की ओर जाने वाले पैदल मार्ग की जानकारी स्थानीय लोगों या गाइड से लेनी चाहिए। यह ट्रेक पूरी तरह विकसित पर्यटन मार्ग नहीं है, इसलिए यात्रा से पहले रास्ते की स्थिति, मौसम और ट्रेकिंग की कठिनाई की जानकारी लेना जरूरी है। स्थानीय गाइड के साथ यात्रा करना और प्राकृतिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। बूढ़ाकेदार के इन तीन तालों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की पहल सफल होती है तो टिहरी के पर्यटन को एक नया विकल्प मिल सकता है। इससे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों की प्राकृतिक विरासत को भी पहचान मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
टिहरी जिले में बहुत सारे ट्रेक उपलब्ध हैं, लेकिन बिखरे तरीके से हैं। कहीं पर उनकी संकलित सूची न होने के कारण उनके बारे में जानकारी का अभाव होता है। बाहर से जब कोई पर्यटक आता है, तो उसे पता ही नहीं होता कि ऐसा कोई ट्रेक भी है। जिसे वो कर सकता है और अगर कर सकता है तो किसके माध्यम से कर सकता है। इस दिशा में सबसे पहला काम हम ये कर रहे हैं कि इसके लिए एक रोस्टर तैयार कर रहे हैं. जिसमें सारे ट्रेक संकलित हों। प्रचार-प्रसार ज्यादा हो और सभी को पता हो कि इसी ग्रुप के जरिए आप इस ट्रेक पर जा सकते हैं। इसके अलावा जब हम ट्रेक्स पर काम करते हैं। कभी बारिश तो कभी दैवीय आपदा से ट्रेकों को क्षति पहुंचती है। जिससे ट्रेकों पर फिर से सुधार करने की आवश्यकता होती है. जो कभी कबार हमारे स्तर से नहीं हो पाती है. उसके लिए भी हम तैयारी कर रहे हैं कि साल सालभर में उसको मेंटेन कराते रहें। जिससे आने वाले पर्यटकों को कोई दिक्कत ना हो।
क्यों खास हैं तीनों ताल?
1. जराल ताल
टिहरी के बूढ़ाकेदार में स्थित जराल ताल आसपास के पहाड़ी भू-दृश्य और अन्य खूबसूरत प्राकृतिक नजारों से घिरा हुआ है। ताल के चारों ओर बांज समेत अन्य प्रजाति के हरे भरे पेड़ हैं। इस ताल के किनारे एक मंदिर भी है. यह ताल काफी खूबसूरत है. जो लोगों को खूब आकर्षित करती है।
2. मंजयारा ताल
बूढ़ाकेदार का प्राकृतिक ट्रेकिंग क्षेत्र में मंजयारा ताल भी प्रमुख स्थलों में से एक है। आसपास के जंगल, पहाड़ी रास्ते और खुले बुग्याल इस पूरे क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती को खास बनाते हैं। मंजयारा ताल के किनारों पर घास के मैदान भी हैं। ताल से ही आसपास की पहाड़ियां नजर आती हैं। यह ताल लंबाई में है। इस ताल में जब आसपास के पेड़-पौधों, पहाड़ और आसमान की परछाई पड़ती है, तो नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है।
3. काना ताल
टिहरी के बूढ़ाकेदार का काना ताल भी खूससूरत है। काना ताल को ट्रेकिंग रूट के प्रमुख आकर्षणों में गिना जाता है। इसके आसपास हरे भरे पेड़ और खेत भी मौजूद है। साथ ही घास का मैदान भी है। बरसात के दौरान यह ताल पानी लबालब भरा होता है। गर्मियों में मवेशियां इस ताल में नहाने का मजा लेती है।
