आलू से बदलेगी किसानों की तकदीर, गैरसैंण में खुलेगा प्रसंस्करण केंद्र; काश्तकारों को मिलेगा बाजार..
उत्तराखंड: पहाड़ी किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में चमोली जिले के गैरसैंण में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। क्षेत्र में जल्द ही आलू प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया जाएगा, जहां आलू से चिप्स, वेफर्स, भुजिया, फ्रेंच फ्राइज समेत कई तरह के खाद्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इसके बाद इन उत्पादों की पैकेजिंग और मार्केटिंग कर उन्हें बाजार तक पहुंचाने की योजना है। यह यूनिट भारतीय स्टेट बैंक फाउंडेशन के सहयोग और भुवनेश्वरी महिला आश्रम के संसाधनों से स्थापित की जाएगी। इसको लेकर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में किसानों, काश्तकारों और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में आलू आधारित उद्योग की संभावनाओं, किसानों की भागीदारी और उत्पादन से लेकर विपणन तक की पूरी प्रक्रिया पर चर्चा की गई।भुवनेश्वरी महिला आश्रम के प्रबंधक गिरीश डिमरी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि को रोजगार से जोड़ने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के उद्देश्य से आलू प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना पर करीब 50 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
उन्होंने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक फाउंडेशन की ओर से इस कार्य के लिए 25 लाख रुपये की अनुदान राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। यूनिट शुरू होने के बाद इसे सहकारी मॉडल पर संचालित करने की योजना है, जिससे अधिक से अधिक स्थानीय काश्तकारों को इससे जोड़ा जा सके और उन्हें आर्थिक लाभ मिल सके।कार्यशाला में खंसर क्षेत्र के कंडारीखोड़ गांव निवासी कौशल रावत ने कहा कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के साथ अपनी उपज की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता पर भी ध्यान देना होगा। बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों से ही बाजार में अच्छी कीमत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि खेती और बागवानी को रोजगार का मजबूत माध्यम बनाने के लिए जरूरी है कि गांवों में कृषि से जुड़े संसाधनों और सुविधाओं पर अधिक ध्यान दिया जाए।
उत्पादन के बाद बिक्री सबसे बड़ी चुनौती
रामगंगा किसान फेडरेशन गैरसैंण के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह रावत और त्रिलोक सिंह नेगी ने कहा कि किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या अक्सर उत्पादों के विपणन की रहती है। कई बार बेहतर उत्पादन के बावजूद उचित बाजार और सही कीमत नहीं मिलने से खेती घाटे का सौदा साबित हो जाती है।उन्होंने कहा कि किसानों और फेडरेशन के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है, ताकि उत्पादों की बिक्री व्यवस्थित तरीके से हो सके और किसानों को इसका पूरा लाभ मिल पाए। कार्यशाला में कई किसानों ने कृषि योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिलने की शिकायत भी रखी। दीपा देवी और लक्ष्मी देवी सहित अन्य काश्तकारों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ पहुंचाने के लिए अधिक प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए। सिराणा गांव से पहुंचे बुजुर्ग किसान बुद्धे सिंह ने बताया कि कई ग्रामीणों ने सेब उत्पादन का प्रयास किया, लेकिन जंगली जानवरों और पक्षियों के कारण फसल को नुकसान पहुंचा। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों में खेती को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षा और संरक्षण की व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई। परिवर्तन समिति के महेशानंद जुयाल ने कहा कि गैरसैंण में आलू प्रसंस्करण इकाई की सफलता से क्षेत्र में कृषि आधारित अन्य उद्योगों की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इससे स्थानीय उत्पादों को नया बाजार मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। आलू उत्पादन के लिए प्रसिद्ध पर्वतीय क्षेत्रों में इस तरह की प्रसंस्करण इकाइयां किसानों की आय बढ़ाने के साथ पलायन रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

